Telangana Elections Results 2018 Live: बहुमत से ज्यादा सीटों पर TRS को बढ़त, कांग्रेस पिछड़ी - NDTV India     |       Urjit Patel resigns as RBI Governor, cites personal reasons - Bangalore Mirror     |       Vijay Mallya verdict: UK Westminster Court orders Mallya's extradition - Times Now     |       बड़ा सवाल: उपेंद्र कुशवाहा के इस्तीफे से कितनी बदलेगी बिहार की राजनीति, जानिए - दैनिक जागरण     |       तीर्थयात्रा/ पाक ने कटास राज धाम यात्रा के लिए 139 भारतीयों को वीजा दिया - Dainik Bhaskar     |       मोदी सरकार ने RBI की गरिमा की धूमिल, आजादी का हनन करना बीजेपी का DNA बना: कांग्रेस - Firstpost Hindi     |       पांच राज्यों के चुनाव नतीजे देखें सबसे तेज NDTV पर वीडियो - हिन्दी न्यूज़ वीडियो एनडीटीवी ख़बर - NDTV Khabar     |       जिसके पीछे पड़ी है CBI, उसी की कोशिशों से माल्या के प्रत्यर्पण पर मिली सफलता - आज तक     |       Serial killer Mikhail Popkov: Russian ex-policeman convicted over 56 murders - Times Now     |       यहां सरकार कर रही है लोगों से अपील- 'बच्चे पैदा करो, देरी मत करो’ - NDTV India     |       फ़्रांसः राष्ट्रपति मैक्रों ने किया न्यूनतम वेतन बढ़ाने का वादा - BBC हिंदी     |       किराए पर कोख देने वाली लड़कियों की डरावनी कहानी - lifestyle - आज तक     |       उर्जित पटेल की विदाई और आज के चुनाव नतीजों का शेयर बाजार पर क्या होगा असर? - आज तक     |       चुनाव नतीजों के बाद सरकार बढ़ा सकती है पेट्रोल-डीजल के दाम, इतने रुपये की हो जाएगी वृद्धि- Amarujala - अमर उजाला     |       BSNL ने अपने बंपर ऑफर्स में किया बदलाव, अब मिलेंगे ये बड़े फायदे - Patrika News     |       SBI ने MCLR में किया इजाफा, अब बढ़ जाएगी आपके होम लोन और ऑटो लोन की EMI - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       'The Cut' Writer Finally Apologizes to Priyanka Chopra - Papermag     |       Kareena, Saif And Babita Watch Kedarnath - NDTV Movies     |       ईशा-आनंद की पार्टी: रणवीर-अभिषेक और सिद्धार्थ का डांस वीडियो वायरल - आज तक     |       स्टूडेंट्स के साथ सारा अली खान ने किया जमकर डांस, अपनी फिल्म 'केदारनाथ' को प्रमोट करने पहुंची थीं कॉलेज : VIDEO - Dainik Bhaskar     |       फिटनेस हासिल करने की कवायद: पर्थ टेस्ट से पहले पृथ्वी साव ने किया दौड़ना शुरू - Navbharat Times     |       AUS में कोहली का विराट रिकॉर्ड, ऐसा करने वाले पहले एशियाई कप्तान - Sports AajTak - आज तक     |       इस तरह खास है विराट-अनुष्का की शादी की पहली सालगिरह - आज तक     |       AUSvsIND: एडिलेड फ़तह के बाद विराट की कंगारु टीम को चेतावनी, कहा- सिर्फ एक जीत से संतुष्ट नहीं होंगे - Hindustan     |      

मनोरंजन


“न्यूटन” भारतीय सिनेमा का काला हास्य

 ‘न्‍यूटन’ एक राजनीतक फिल्म है जिसे बहुत ही सशक्त तरीके से सिनेमा की भाषा में गढ़ा गया है। यह सिनेमा के ताकत का एहसास कराती है। इस फिल्म की कई परतें है लेकिन अगर आप एक जागरूक नागरिक नहीं हैं....


 newton-black-comedy-of-indian-cinema

भारतीय सिनेमा के लिये “न्यूटन” एक नये मिजाज की फ़िल्म है। बिलकुल ताजी, साबूत और एक ही साथ गंभीर और मजेदार.. इसमें सादगी और भव्यता का विलक्ष्ण संयोग है। न्यूटन का विषयवस्तु भारी-भरकम है, लेकिन इसका ट्रीटमेंट बहुत ही सीधा और सरल है बिलकुल मक्खन की तरह... सिनेमा का यह मक्खन आपको बिलकुल इसी दुनिया का सैर कराता है, जिसमें हमारी जिंदगी की सारी खुरदरी हकीकतें दिखाई पड़ती हैं। इसी के साथ ही यह सिनेमा के बुनियादी नियम मनोरंजन को भी नहीं भूलती है। यह एक क्लास विषय पर मास फिल्म है। नक्‍सल प्रभावित इलाके में चुनाव जैसे भारी भरकम विषय वाली किसी सिताराविहीन फिल्म से आप मनोरंजन की उम्मीद नहीं करते हैं। ऐसा भी नहीं है कि इस विषय पर पहले भी फिल्में ना बनी हों लेकिन ‘न्‍यूटन’ का मनोरंजक होना इसे अलग और ख़ास बना देता है। यह अपने समय से उलटी धारा की फिल्म है। आदर्शहीनता के इस दौर में इसका नायक घनघोर आदर्शवादी है और ऐसा करते हुए वो अजूबा दिखाई पड़ता है यही इस फिल्म का काला हास्य है।

 ‘न्‍यूटन’ एक राजनीतक फिल्म है जिसे बहुत ही सशक्त तरीके से सिनेमा की भाषा में गढ़ा गया है। यह सिनेमा के ताकत का एहसास कराती है। इस फिल्म की कई परतें है लेकिन अगर आप एक जागरूक नागरिक नहीं हैं तो इन्हें पकड़ने में चूक कर सकते हैं। ‘न्‍यूटन’ एक ऐसे विषय पर आधारित है जिसपर बात करने से आम तौर पर लोग कतराते हैं। ये हमें देश के एक ऐसे दुर्गम इलाके की यात्रा पर ले जाती है जिसको लेकर हम सिर्फ कहानियां और फ़साने ही सुन पाते हैं। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इस इलाके में आदिवासी रहते हैं, जो नक्सलियों और व्यवस्था के बीच जी रहे हैं। दंड्यकारंण्य के जंगल दुनिया से कटे हुए है और यहां सिर्फ नक्सलवाद और उदासीन सिस्‍टम की प्रेतछाया ही दिखाई पड़ती है।

फिल्म का हर किरदार एक प्रतीक है, जिसका सीधा जुड़ाव हकीकत की दुनिया से है। ये कहानी नूतन उर्फ न्‍यूटन कुमार (राजकुमार राव) की है, जो एक सरकारी कलर्क है। वो पागलपन की हद तक ईमानदार और आदर्शवादी है। उनकी ड्यूटी छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जंगली इलाके में चुनाव के लिये लगायी जाती है। यह एक ऐसा इलाका है जहां नक्सलियों ने चुनाव का बहिष्कार कर रखा है। जाहिर है किसी के लिए भी यहाँ चुनाव कराना जोखिम और चुनौती भरा काम है।  न्‍यूटन अपने साथियों लोकनाथ(रघुवीर यादव) और स्थानीय शिक्षिका माल्को (अंजली पाटिल) उस इलाके में जाता है। सिक्योरिटी हेड आत्मा सिंह (पंकज त्रिपाठी) और उसके साथी इस काम में उन्हें सुरक्षा देते हैं लेकिन आत्मा सिंह और न्‍यूटन के बीच टकराव की स्थिति बन जाती है, जहां आत्मा सिंह मतदान के इस काम को बिलकुल टालने और खानापूर्ति वाले अंदाज में करना चाहता है। वहीं न्‍यूटन का नजरिया बिलकुल उल्टा है, वो काम के प्रति आस्था और बेहतरी की उम्मीद से लबरेज है और किसी भी तरीके से निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया को अंजाम देना चाहता है और इसके लिये वो हर तरह के खतरे और रिस्क को उठाने को तैयार है।

राजकुमार राव, पंकज त्रिपाठी, अंजलि पाटिल, रघुबीर यादव जैसे अव्वल दर्जे के कलाकारों से सजी यह फिल्म आपको किसी स्टार की कमी महसूस नहीं होने देती है। राजकुमार राव के पास अब कुछ भी साबित करने को नहीं बचा है। इसके बावजूद भी वो हर बार अपने अभिनय से हमें चौंकाते हैं, वे अपने किरदारों में इस कदर समां जाते हैं कि कोई फर्क नहीं बचता है। यहां भी उन्होंने ठीक यही काम किया है। रघुवीर यादव पुराने और मंजे हुए कलाकार हैं, जो की इस फिल्म में साफ़ नजर आता है। पंकज त्रिपाठी के लिए यह साल गोल्डन साल साबित हो रहा है, उनके अभिनय की सहजता आकर्षित करती है। इन सबके बीच अंजलि पाटिल स्मिता पाटिल की याद दिला जाती हैं।

एक भारी भरकम विषय को बेहद हलके फुलके अंदाज में पेश करना एक अद्भुत कला है। यह विलक्षण संतुलन की मांग करता है। निर्देशक अमित मसुरकर ने यह काम कर दिखाया है। अपने इस दूसरी फिल्म से ही उन्होंने बता दिया है कि वे यहां किसी बने बनाये लीक पर चलने नहीं आये हैं बल्कि नये रास्ते खोजने आये हैं, जिस पर दूसरे निर्देशकों को चलना है। वे उम्मीदें जागते है जिसपर आने वाले समय में उन्हें खरा उतरना है।

प्रोपगंडा भरे इस दौर में बिना किसी एजेंडे के सामने आना दुर्लभ है। दरअसल इस तरह के विषयों पर बनने वाली ज्यादातर फिल्में अपना एक पक्ष चुन लेती है और फिर सही या गलत का फैसला सुनाने लगती हैं, लेकिन ‘न्‍यूटन’ में इसकी जरूरत ही नहीं महसूस की गयी हैं। इसमें बिना किसी एक पक्ष को चुने हुए कहानी को बयान किया गया है और तथ्यों को सामने रखने की कोशिश की गयी है। सिनेमा की बारीकी देखिए कि न्यूटन  किसी भी तरह से ना आपको भड़काती है और ना ही उकसाती है और ना ही कोई सवाल उठाती हुई ही दिखाई पड़ती है, लेकिन बतौर दर्शकों आप इन सवालों को महसूस करने लगते हैं और कई पक्षों में अपना भी एक पक्ष चुनने लगते हैं। फिल्म का हर दृश्य बोलता है जो कि कमाल है। न्यूटन एक परिपक्व सिनेमा है जो कहानी को नये ढंग से बयान करती है, उम्मीद की जानी चाहिए कि भारतीय सिनेमा का यह काला हास्य दुर्लभ बन कर नहीं रह जायेगा।

 

advertisement