विधानसभा चुनाव नतीजे: कैलाश विजयवर्गीय ने की कांग्रेस की तारीफ, क्या मान ली हार?- Amarujala - अमर उजाला     |       Congress Workers Celebrate Outside Sachin Pilot's House In Jaipur - NDTV     |       RBI governor Urjit Patel resigns: Read Full Statement here - Times Now     |       राजस्थान विधान सभा चुनाव परिणाम 2018 Live Updates:राजस्थान में रुझाने आने शुरू, कांग्रेस आगे, बीजेपी पीछे - NDTV India     |       Telangana Election Result 2018: रुझानों में TRS को दो तिहाई बहुमत - आज तक     |       Vijay Mallya verdict: UK Westminster Court orders Mallya's extradition - Times Now     |       तीर्थयात्रा/ पाक ने कटास राज धाम यात्रा के लिए 139 भारतीयों को वीजा दिया - Dainik Bhaskar     |       उर्जित पटेल के इस्तीफे पर मनमोहन सिंह ने दिया ये बड़ा बयान - Hindustan     |       Serial killer Mikhail Popkov: Russian ex-policeman convicted over 56 murders - Times Now     |       यहां सरकार कर रही है लोगों से अपील- 'बच्चे पैदा करो, देरी मत करो’ - NDTV India     |       फ़्रांसः राष्ट्रपति मैक्रों ने किया न्यूनतम वेतन बढ़ाने का वादा - BBC हिंदी     |       कैमरे के सामने देख रहा था पाकिस्तानी रिपोर्टर, तेज रफ्तार से दौड़ते हुए आए कुत्ते और फिर... देखें Video - NDTV India     |       सेंसेक्स 35000 के नीचे फिसला, निफ्टी 2% नीचे बंद - - मनी कॉंट्रोल     |       पेट्रोल-डीजल की कीमतों में गिरावट जारी, जानें क्या हैं आज के भाव - Zee Business हिंदी     |       उर्जित पटेल की विदाई और आज के चुनाव नतीजों का शेयर बाजार पर क्या होगा असर? - आज तक     |       SBI ने MCLR में किया इजाफा, अब बढ़ जाएगी आपके होम लोन और ऑटो लोन की EMI - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       Not films, this is what father-daughter duo Saif Ali Khan and Sara Ali Khan bond over - details inside - Times Now     |       ईशा अंबानी की शादी: मां और पत्नी को लेकर वापस लौटे अनिल अंबानी - आज तक     |       सैफ और अमृता ने 'केदारनाथ' रिलीज के बाद किया कुछ ऐसा, सारा को भी नहीं हुआ यकीन - Hindustan     |       निक जोनस के साथ अपनी उम्र के फासले पर बोली प्रियंका चोपड़ा - नवभारत टाइम्स     |       एडिलेड में जीत के बाद फिसली रवि शास्त्री की जुबान, टीवी पर कर दी अभद्र टिप्पणी - Webdunia Hindi     |       इस तरह खास है विराट-अनुष्का की शादी की पहली सालगिरह - आज तक     |       AUS में कोहली का विराट रिकॉर्ड, ऐसा करने वाले पहले एशियाई कप्तान - Sports AajTak - आज तक     |       AUSvsIND: एडिलेड फ़तह के बाद विराट की कंगारु टीम को चेतावनी, कहा- सिर्फ एक जीत से संतुष्ट नहीं होंगे - Hindustan     |      

फीचर


भारत जैसी विविधता और कहीं नहीं : अन्ना एडोर

दरअसल मुंबई की भारी बरसात से बचने की कोशिश में हम कुछ लोग अपने एक परिचित के उस घर में जा घुसे, जो कुत्ते-बिल्लियों के लिए विख्यात है।


anna-aidor-says-diversity-like-india-and-nowhere-else

इस वक्त भारत में जिस तरह का नकारात्मक माहौल बना हुआ है, वह बाहर के लोगों को डराने और चिंतित करने के लिए काफी है। जाने-अनजाने लोग एक-दूसरे को शक की निगाह से देखने लगे हैं। भरोसे पर अविश्वास हावी हो गया है। बात-बात पर यह कहने वाले हजारों मिल जाते  हैं कि यह देश रहने लायक नहीं रह गया है। ऐसे समय में अगर मुंबई में कोई लड़की निडर होकर घुमते-फिरते यह कहे कि भारत से अच्छा और कोई देश नहीं लगता है तो चौंकना स्वाभाविक है। वह न तो किसी राजनीतिक दल की प्रचारक है,  न मनोविज्ञानी है और न जादूगर। वह आत्मविश्वास से लदी एक विदेशी लडकी है, जो भारत से जाने के बारे में सोचकर ही परेशान हो जाती है। उससे मुलाक़ात भी अचानक और कुछ अलग अंदाज में हुई। उसने अपनी सोच से यह सिखा भी दिया कि पोजिटिविटी क्या होती है।    

दरअसल मुंबई की भारी बरसात से बचने की कोशिश में हम कुछ लोग अपने एक परिचित के उस घर में जा घुसे, जो कुत्ते-बिल्लियों के लिए विख्यात है। आप दरवाजे के अन्दर घुसे नहीं कि घर की मालकिन के पहले कुत्ते-बिल्लियां आपका स्वागत करने के लिए हाजिर हो जाएंगे। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। कुत्ते नज़र नहीं आए और बिल्लियों ने हमारे आने की नोटिश नहीं ली। यह कुछ अजीब-सा लगा। सोचने लगा कि अनुशा और नंदिनी,  दोनों बहनों का पशु-प्रेम गायब हो गया क्या? तभी देखा, सामने झूले पर एक खूबसूरत विदेशी लड़की बैठी हुई है। बिल्लियां उसके साथ खेलने में मगन है और वह लडकी भी सघन पुचकार में डूबी हुई है। 

आहट पाकर वह लड़की झूले से उठकर खड़ी हो गयी। पहचान न होने की बावजूद सिर नबाकर मुस्कुराते हुए नमस्कार किया। अनुशा ने उस लड़की से परिचय कराया तो आश्चर्य में पड़ना स्वाभाविक था। वह अच्छी हिन्दी बोल रही थी। नाम अन्ना एडोर और बेलारूस की रहने वाली। यह इन दिनों हिन्दी सिनेमा में अपना भाग्य आजमा रही है। वैसे, बेलारूस और उक्रेन की काफी लडकियां अपना जीवन चलाने के लिए हिंदी सिनेमा में एक्स्ट्रा का काम कर रही हैं। खासकर डांसर के रूप में। चूंकि ये बहुत खूबसूरत होती हैं इसलिए ग्लैमर के लिए इनका जमकर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इनमें शायद ही कोई ठीक से हिन्दी बोल पाती है। हिन्दी तो कैटरीना कैफ भी नहीं सीख पायी हैं जबकि वह सालों से हिन्दी सिनेमा में जमी हुई हैं।

लेकिन अन्ना एडोर कुछ अलग है। बातचीत में वह भारत, खासकर मुंबई-दिल्ली के बारे में इस अंदाज़ में बातें कर रही थी, मानो वह यहीं की रहने वाली हो और हम किसी और देश से आए हों। उसकी बातों में भारत को लेकर जो उम्मीदें हैं, विस्मय से भरने लगती हैं। दरअसल एडोर बचपन से ही हिन्दी सिनेमा की दीवानी रही हैं। कहती है, ‘बेलारूस के जिस इलाके में मेरा घर है, वहां अच्छी संख्या में भारतीय हैं। उन्हीं से मुझे भारत के बारे जानने को मिला। यहां के किस्से-कहानियां और फिल्मों ने मुझपर जबरदस्त असर डाला। हिंदी फिल्मों का ऐसा चस्का लगा कि अपने घर से दूर, शहर जाकर फिल्मों के कैसेट लाती और देखने के चक्कर में भूख-प्यास भूल जाती। तब हिन्दी ज्यादा नहीं समझ पाती थी। सब-टाइटल पढ़कर समझने की कोशिश करती। लेकिन मज़ा नहीं आता। मेरा इससे जब काम नहीं चला तो सोच लिया कि  हिन्दी सीख कर ही रहूंगी।’ यह भी एक सच है कि अन्ना एडोर के व्यापारी पिता लाख कोशिशों के बाद भी हन्दी सीख नहीं पाए जबकि वे भारतीयों के संपर्क में ज्यादे थे। 

सोलह साल की थी, जब अन्ना एडोर को एक शादी में भाग लेने के लिए दिल्ली आने का मौक़ा मिला। वह अपने आप में खोयी रही कि उस देश में जा रही है, जहां की फ़िल्में उसे काफी पसंद है। उसने शादी के रस्म-रिवाज को कौतुहल से देखा और जमकर इंज्वाई किया। ‘मैं जिस घर में आयी थी, उसके किसी सदस्य ने कभी किसी बात की कमी महसूस नहीं होने दी। परिवार का हिस्सा बनकर रही। दिल्ली के बाज़ार, पर्यटन स्थल, लोगों की जिंदादिली और उनकी मस्ती ने मुझे सम्मोहन में बांध दिया। मैं बेलारूस लौटकर ज्यादा दिनों तक ठहर नहीं पायी। दिल्ली आ गयी। तीन साल रही। इसी दौरान एक्टिंग सीखी। थियेटर किया और मॉडलिंग की। बार टेंडर से लेकर शादियों तक में ढोल बजाकर पैसे कमाए ताकि अपनी ज़िन्दगी जी सकूं। लेकिन मैंने यह निश्चित कर लिया कि इंडिया नहीं छोडूंगी क्योंकि यह अपना लगता है।‘

एडोर बाद में फिल्मों में काम पाने के लिए मुंबई पहुंच गयी। सोच लिया कि छोटा रोल भी मिले, वह भी करेगी। जब पहचान बन जाएगी, तब कुछ और सोचेगी। उसे इस देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत कुछ सीखने को मिला। ‘पहले तो यह सुनकर मैं हैरान हुई थी कि इतने बड़े देश का पीएम बड़ी बातें करने की बजाए झाडू लगाने, सफाई करने और शौचालय की बात कर रहे हैं। दुनिया का यह एक अजूबा मामला है। लेकिन बाद में मुझे समझ आयी कि छोटी-छोटी बातों का कितना बड़ा अर्थ है। इसी से देश का इमेज बनता है। बाहर से आने वालों की पहली नज़र शहर की सुन्दरता और साफ़-सफाई पर ही जाती है। मैंने भी उन बातों की गांठ बांध ली। अपने आस-पास को स्वच्छ रखने की कोशिश करती हूं। यही वज़ह है कि मुझे आज अपने जीवन से परेशानी नहीं होती है। संघर्ष मुझे डराता नहीं है।’ एडोर को मुंबई में ज्यादा भटकना नहीं पड़ा। यशराज प्रोडक्शन की फिल्म ‘कैदी बैंड’ में छोटा सा ही सही, लेकिन डांसर का अच्छा रोल मिला। ‘उड़ता पंजाब’ में भी काम किया। फिल्म ‘गुडगांव’ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह लड़की सबसे ज्यादा खुश इस बात से है कि उसे बालाजी टेली फिल्म्स के एक वेब सीरिज में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जैसे महान क्रांतिकारी नेता की जर्मन-पत्नी का किरदार निभाने का मौक़ा मिला। एक गुजराती फिल्म भी की है। वह हिन्दी नाटक भी कर रही है, यानी पूरी तरह भारतीय हो जाने की कोशिश में है। अन्ना के ललाट पर बिन्दीनुमा एक चिन्ह है। हंसती हुई बताती है कि ‘यहां की महिलाएं ललाट पर बिंदी लगाती हैं लेकिन भगवान ने तो मुझे जन्म के साथ ही बिंदी दे दी है।‘

कभी-कभी लगता है कि बाहर से आने वाले एक्टरों को सिर्फ पैसे से मतलब होता है। वे अपनी जेबें भरने आते हैं, लेकिन अन्ना एडोर उस नज़रिए को खारिज करती-सी लगती है। उसे यहां का अध्यात्म पसंद है, उसमें आस्था भी है। कहती है, यह जीवन जीने में मदद और अच्छे-बुरे की पहचान कराता है। वह गणपति के दर्शन करती है। ‘मुंबई की बारिश किसी कल्पनालोक की तरह लगती है। बारिश में गणपति-विसर्जन को देखना मुझे सबसे ज्यादा आनंददायक लगता है। विसर्जन के साथ अगले साल फिर आने का जो मनुहार और आग्रह होता है, उसका अपनापन इमोशनल कर देता है। भारी बारिश में भी पूरी-पूरी रात मूर्तियों के साथ चलने का धैर्य, उत्साह और अनुशासन मेरे लिए पाठ की तरह है। मुझे भारत जैसी विविधता और कहीं दिखाई नहीं देती है। यहां गोर-काले की भेद नहीं है।‘

यहां आने के बाद अन्ना एडोर के सोचने का तरीका बदला है और जीवन के प्रति उसका विश्वास बढ़ा है। उसके अन्दर न कोई भेद, न दिखावा, न आरोप और न नफरत के भाव हैं। उसके पास इस बात के सबूत नहीं है कि उसे भारत से कितना प्यार है लेकिन उसने कत्थक सीखी, हिंदी को अपनी भाषा बनाया। सत्यजीत राय और विमल राय की लगभग सारी फ़िल्में देखकर गर्व महसूस किया। दिलीप कुमार, राजकपूर, गुरुदत्त, मधुबाला, मीना कुमारी, माधुरी, शाहरुख, सलमान, इरफ़ान खान, राजकुमार राव, नवाजुद्दीन सिद्दीकी को अपना माना। मुगले आजम, आवारा, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, थ्री इडियट्स, मसान जैसी फिल्मों में विविधता के दर्शन किए।

बेलारूस की एडोर खुश है कि दोनों देशों के संबंध बहुत अच्छे हैं। उसे भारत अपना लगता है, यहां की हर चीज से उसे प्यार है।

...लेकिन हम हैं कि अपनी ही चीजों से दूर होते जा रहे हैं। क्या हम अन्ना एडोर से कुछ सीख सकते हैं?

--आनंद भारती

  

advertisement

  • संबंधित खबरें