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फीचर


विकास दर की सुस्ती कहीं महंगी न पड़ जाए सरकार को

वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में सीधे 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल में इस तिमाही के 7.9 के मुकाबले जीडीपी घटकर 5.7 फीसदी रह गई।


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विभिन्न आर्थिक संकटों के बीच जिस एक बात को लेकर आगे मोदी सरकार के लिए अपनी छवि और प्रदर्शन को बचाने में मुश्किल हो सकती है, वह है विकास दर की मंद पड़ती जा रही रफ्तार। इस रफ्तार की सुस्ती के साथ बेरोजगारी का सवाल देश के प्राइम एजेंडा में तेजी से ऊपर चढ़ता जा रहा है। दरअसल, सेंसेक्स भले अपनी तीस हजारी चढ़ाई से उतरने का नाम नहीं ले रहा, पर आर्थिक विकास की नैया ने इस बीच खूब हिचकोले खाए हैं।

वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में सीधे 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल में इस तिमाही के 7.9 के मुकाबले जीडीपी घटकर 5.7 फीसदी रह गई। सरकार के सामने यह बड़ा सवाल है कि कैसे सकारात्मक आर्थिक आंकड़ों के साथ आगे बढ़े क्योंकि 2019 में आम चुनाव होने हैं और डेढ़ वर्ष से भी कम का समय सरकार के पास है। जीडीपी की वृद्धि दर लगातार छठी तिमाही में घटी है। आर्थिक समीक्षा-दो में यह अनुमान जताया गया है कि अपस्फीति दबाव के कारण चालू वित्त वर्ष में 7.5 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करना संभव नहीं होगा। इसके साथ ही औद्योगिक वृद्धि दर भी 5 साल में सबसे नीचे आ गया है। देश के सबसे बड़े कर सुधार कानून जीएसटी को और व्यावहारिक बनाने में भले सरकार लगी हुई है, पर इसमें भी अभी काफी सुधार की दरकार है।

इसी तरह, देश में युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से लाभ पहुंचाने को लेकर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से काफी उम्मीदें जगाई गई थी। दुनिया के सबसे युवा देश के युवा वोटरों ने इस उम्मीद पर भरोसा भी दिखाया। पर यह भरोसा अब कहीं न कहीं लड़खड़ाता नजर आ रहा है और इसका गुस्सा युवा एवीएम मशीन का बटन दबाते हुए अगर दिखाते हैं, तो इसे अनेपिक्षित नहीं कहा जाएगा। श्रम ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, देश की बेरोजगारी दर 2015-16 में पांच प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पांच साल का उच्च स्तर है। अखिल भारतीय स्तर पर पांचवें सालाना रोजगार-बेरोजगारी सर्वे के अनुसार करीब 77 प्रतिशत परिवारों के पास कोई नियमित आय या वेतनभोगी व्यक्ति नहीं है। 

श्रम ब्यूरो के अनुसार, 2013-14 में बेरोजगारी दर 4.9 प्रतिशत, 2012-13 में 4.7 प्रतिशत, 2011-12 में 3.8 प्रतिशत तथा 2009-10 में 9.3 प्रतिशत रही। 2014-15 के लिए इस प्रकार की रिपोर्ट जारी नहीं की गई थी। इस बीच रोजगार सृजन के क्षेत्र में बाधा आने के संकेत के बारे में भी आईएलओ पहले ही आगाह कर चुका है। इस साल के शुरू में आईएलओ की जारी रिपोर्ट में कहा गया है, 'आशंका है कि पिछले साल के 1.77 करोड़ बेरोजगारों की तुलना में 2017 में भारत में बेरोजगारों की संख्या 1.78 करोड़ और उसके अगले साल 1.8 करोड़ हो सकती है। प्रतिशत के संदर्भ में 2017-18 में बेरोजगारी दर 3.4 प्रतिशत बनी रहेगी।'

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