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राजनीति


हिमाचल विधानसभा : महेश्वर बीजेपी के साथ, कुल्लू से लड़ेगे चुनाव

हालांकि विज नदी के किनारे बसे इस कुल्लू क्षेत्र को 'देवताओं की घाटी' कहा जाता है। सिल्वर वैली के नाम से प्रसिद्ध यह क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के साथ साथ एडवेंचर स्पोर्ट के लिए खासा मशहूर है।


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नई दिल्ली: अपनी खुबसरती  से देश ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी लुभाने वाला कुल्लू और मनाली राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए तैयार है। इन सब के बीच इस क्षेत्र के विकास को लेकर यहां की राजनीति मुख्य मानी जा रही है। बता दें कि परीसीमन के बाद कुल्लू और मनाली दोनों अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र हो गए थे। यदि हम कुल्लू विधानसभा सीट की बात करें तो यह हिमाचल प्रदेश विधानसभा सीट संख्या-23 पर आता है। इस विधानसभा की कुल आबादी 117,238 है, जिसमें से इस बार 76230 मतदाता अपने मतों का प्रयोग कर सकेंगे।

हालांकि विज नदी के किनारे बसे इस कुल्लू क्षेत्र को 'देवताओं की घाटी' कहा जाता है। सिल्वर वैली के नाम से प्रसिद्ध यह क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के साथ साथ एडवेंचर स्पोर्ट के लिए खासा मशहूर है। इसके साथ ही कुल्लू क्षेत्र हवाई सेवा से भी जुड़ चुका है। कुल्लू विधानसभा राजनीतिक पृष्ठभूमि की दृष्टि से राजपूत बहुल क्षेत्र है और इसके बाद नंबर ब्राह्मण मतादाताओं का आता है। इस क्षेत्र की यह खासियत रही है कि यहां बरसों से राज परिवार राज करता आया है। कुल्लू विधानसभा में 1967 के बाद से अब तक हुए 11 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें कांग्रेस ने छह बार बाजी मारी है।

कांग्रेस के राज किशन गौड़ ने अकेले चार बार 1985, 1990, 1998 और 2003 में इस सीट पर अपना परचम लहराया था। राज के बाद कांग्रेस इस सीट को पिछले एक दशक से हथियाने में कामयाब नहीं हो पाई है, जबकि बीजेपी ने तीन बार 1982, 1993 और 2007 में इस सीट पर कब्जा जमाया था। इसके अलावा यहां से एक बार जनता पार्टी और एक दफा हिमाचल लोकहित पार्टी ने जीत हासिल की है। चुनाव से पहले हिमाचल लोकहित पार्टी का बीजैपी में विलय हो गया है।

हालांकि कुल्लू विधानसभा पर मौजूदा विधायक और राज परिवार से ताल्लुक रखने वाले नेता महेश्वर सिंह क्षेत्रीय राजनीति के महारथियों में से एक हैं। 68 वर्षीय सिंह ने 1972 में कुल्लू नगर पालिका का सदस्य बन अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वे जनता पार्टी में शामिल हो गए और जनता पार्टी के विधायक दल के महासचिव बने। सिंह दो बार प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष का पद संभाल चुके हैं और तीन बार बीजेपी के बैनर तले सांसद रहे हैं, लेकिन पार्टी की नीतियों के विरोध के चलते उन्होंने पार्टी को अलविदा कह दिया और अपनी नई पार्टी हिमाचल लोकहित पार्टी का गठन किया। इन्होंने 2012 में कुल्लू से विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कर बीजेपी और कांग्रेस को सकते में डाल दिया था। 

बीजेपी ने अपनी जड़ें कमजोर होती देख महेश्वर को मनाया और इसका असर भी देखने को मिला। चुनाव से पहले ही हिमाचल लोकहित पार्टी का बीजेपी में विलय हो गया और अब महेश्वर बीजेपी के टिकट से कुल्लू सीट पर बतौर उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं। वहीं कांग्रेस ने महेश्वर सिंह के खिलाफ सुरेंद्र सिंह ठाकुर को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुंदर सिंह ठाकुर दूसरी बार महेश्वर सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने जा रहे हैं। कांग्रेस पिछले एक दशक से कुल्लू विधानसभा से दूर रही है ऐसे में पार्टी राजपूत बहुल क्षेत्र में ठाकुर के सहारे अपनी खोई जमीन तलाशने में जुटी है। 

इसके अलावा राष्ट्रीय आजाद मंच की उम्मीदवार रेणुका डोगरा और निर्दलीय उम्मीदवार कमल कांत शर्मा चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। राजपूत बहुल क्षेत्र होने और राज परिवार का दबदबा होने के कारण कुल्लू विधानसभा सीट वीआईपी सीटों में शुमार है। एक तरफ जहां राज घराने के दिग्गज नेता हैं तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस अपने एक दशक पुराने रिकॉर्ड को सुधारने की कोशिश में है। पहाड़ी राज्य हिमाचल में 9 नवंबर को मतदान होना है और मतगणना 18 दिसंबर को होगी। 

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