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गपशप


बिहार कांग्रेस को नया अध्यक्ष

अखिलेश सिंह 2004 के लालू लहर में लोकसभा का चुनाव जीत गए थे और लालू की कृपा से वे यूपीए-I सरकार में मंत्री भी बन गए थे।


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बिहार कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर धकमपेल मची है। बिहार के कांग्रेस प्रभारी सीपी जोशी एक ऐसे नाम की पैरवी कर रहे हैं जिसको लेकर राहुल गांधी खुश नहीं बताए जाते हैं। सीपी जोशी अखिलेश सिंह की पैरवी कर रहे हैं, जो भूमिहार जाति से ताल्लुक रखते हैं, अखिलेश सिंह 2004 के लालू लहर में लोकसभा का चुनाव जीत गए थे और लालू की कृपा से वे यूपीए-I सरकार में मंत्री भी बन गए थे। पर अखिलेश ने 2009 में लालू का साथ छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसके बाद हुए जितने भी चुनाव में उन्होंने हिस्सा लिया, वे कोई भी चुनाव जीत नहीं पाए, यहां तक कि इस बार का विधानसभा चुनाव भी वे हार गए। अब इनके विरोधी कह रहे हैं कि एक हारा हुआ नेता कैसे पार्टी को राज्य में जीत का स्वाद चखा सकता है। दूसरा नाम श्याम सुंदर सिंह धीरज का चल रहा है, जो 17 साल तक यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और कभी सीताराम केसरी के खासमखास में शुमार होते थे, केसरी के जमाने में ही इन्होंने सोनिया को पार्टी अध्यक्ष बनाने की वकालत कर दी थी, नाराज़ होकर केसरी ने इन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया था। यह पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखते हैं, राहुल भी इनके नाम को आगे बढ़ाने के पक्षधर दिखते हैं। एक और नाम प्रेमचंद्र मिश्र का है जो छात्र राजनीति से आगे आए हैं, पर चुनाव जीतने के मामले में इनका रिकार्ड भी सिफर है। एक और नाम मदन मोहन झा का चल रहा है जो इस बार का चुनाव जीते हैं। बिहार में कांग्रेस के लिए संभावनाओं की जमीन काफी ऊर्वरा है, क्योंकि फिलवक्त लालू कमजोर विकेट पर खेल रहे हैं, कांग्रेस को इस बात का फायदा मिल सकता है।

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