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राजनीति


क्यों चुनाव नहीं लड़ना चाहते सचिन और भंवर जीतेंद्र?

गुरुदासपुर की जीत का डंका कांग्रेस भले ही जोरों से पीट रही हो और गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव में भुनाने की तैयारी कर रही हो। लेकिन कांग्रेस ओर बीजेपी दोनों बेहतर जानती है


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गुरुदासपुर की जीत के बावजूद राजस्थान में होने वाले लोकसभा के उपचुनाव में उतरने से कांग्रेस के दो दिग्गज नेता कतरा रहे हैं। राजस्थान में अजमेर और अलवर लोकसभा सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं। राहुल गांधी इन सीटों पर सचिन पायलट और भंवर जीतेंद्र सिंह को चुनाव लड़वाना चाहते हैं। लेकिन मुश्किल यह है कि ये दानों नेता मैदान में उतरने से कतरा रहे हैं।

गुरुदासपुर की जीत का डंका कांग्रेस भले ही जोरों से पीट रही हो और गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव में भुनाने की तैयारी कर रही हो। लेकिन कांग्रेस ओर बीजेपी दोनों बेहतर जानती है कि गुरुदासपुर की जीत की वजह तकनीकी है, न कि मोदी के खिलाफ जन उभार। चुनाव नतीजों के विश्लेषण से यह साफ हो चुका है कि गुरुदास पुर के स्थानीय अकाली विधायक और कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के पक्ष में काम नहीं किया। बीजेपी के भी बहुत कार्यकर्ता अपने घरों में बैठे रहे। सलारिया की छवि भी हार की बड़ी वजह बनी। सलारिया के खिलाफ एक महिला ने गंभीर इारोप लगाए थे और उसका साथ देने वालों में विनोद खन्ना की पत्नी भी थीं। जाहिर है कांग्रेस की यह बड़ी जीत ज्यादा राजनीतिक मायने नहीं रखती।

राजस्थान की सियासी जमीन पर अब भी कमल खिला है और कांग्रेस के पास ऐसा कुछ नहीं है, जिसके आधार पर वह चुनाव जीतने की उम्मीद लगा सके। इस जमीनी सच्चाई को जनते हुए सचिन पायलट और  भंवर जीतेंद्र सिंह अपनी जान बचाने में लगे हैं। दोनों के सामने मुश्किल यह है कि अगर राहुल गांधी की इच्छा के अनुसार वे मैदान में उतरते हैं और हारते हैं तो उन पर लगातार दो चुनाव हारने का ठप्पा लगेगा। पार्टी में उनकी हवा तो निकलेगी ही राहुल के दरबार में भी वजन कम हो जाएगा। इसीलिए राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद लगाए सचिन किसी भी सूरत में चुनाव से बचना चाहते हैं। प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे की मुश्किल यह है कि वहां कांग्रेस के पास कोई दूसरा नेता नहीं है जिसे चुनाव मैदान में उतारा जाए।

अविनाश पांडे की संगठनिक पकड़ और समझ भी उतनी नहीं है कि इस स्थिति को संभाल सकें। क्योंकि ये अविनाश पांडे वही हैं जिन्होंने शराब के ठेके के लिए नागपुर के जिला कलक्टर को थप्पड़ मारा था और 1986 में उसके विरोध में देशभर के आईएएस अधिकारी हड़ताल पर गए। तब राजीव गांधी ने अविनाश पांडे को किनारे लगा दिया था। तब से कोने में पड़े अविनाश पांडे को झाड़ पोछ कर राहुल गांधी ने राजस्थान का प्रभारी बना दिया।

 राजस्थान के चुनाव मैदान में सचिन और भंवर जीतेंद्र सिंह अपनी जान बचाने में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ राहुल उन्हें मैदान में देखना चाहते हैं। इन तीनों के चक्कर में अविनाश पांडे चक्कर खा रहें हैं।

 

 

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