मायावती पर विवादित बयान, बीजेपी विधायक साधना सिंह ने जताया खेद - Navbharat Times     |       ब्रिटेन को पछाड़कर 2019 में दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है भारत: पीडब्ल्यूसी - Dainik Bhaskar     |       पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीकांत जेना पर हुई कार्रवाई, कांग्रेस ने पार्टी से निकाला - आज तक     |       total lunar eclipse: 67 मिनट में ढक जाएगा पूरा चांद, जानें ग्रहण का टाइम - Hindustan     |       जेईई (मेंस) के परीक्षा परिणाम घोषित, 15 छात्रों ने 100 प्रतिशत अंक हासिल किए - Webdunia Hindi     |       रेलवे स्टेशन पर कुल्हड़ की वापसी, रेल मंत्री का है ये निर्देश! - News18 Hindi     |       विपक्ष की महारैली में उमड़ा जनसैलाब, नेताओं ने भरी मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने की हुंकार- Amarujala - अमर उजाला     |       BJP leader from Madhya Pradesh Manoj Thackeray found dead after morning walk, probe underway - Times Now     |       मेक्सिको: तेल पाइपलाइन में हुए धमाके से अब तक 73 लोगों की मौत, 74 घायल - आज तक     |       Mauritian Prime Minister Pravind Jugnauth to arrive in India on 8-day visit - Times Now     |       नहीं रहा दुनिया का सबसे वृद्ध शख्स, जानिये कितनी थी उम्र... - NDTV India     |       नशे में महिला सैनिक ने पुरुष साथी का किया यौन शोषण, नहीं मिली सजा - trending clicks - आज तक     |       पेट्रोल-डीजल के दाम में रविवार को हुई भारी बढ़ोतरी, फटाफट जानें नए रेट्स - News18 Hindi     |       Amazon Sale: यहां देखें सस्ते स्मार्टफोन और हेडफोन की लिस्ट - आज तक     |       अनिल अंबानी की डूबती नइया बचाने उतरे छोटे बेटे अंशुल अंबानी, ऐसे करेंगे पिता की मदद - Patrika News     |       Amazon Great Indian Sale: अमेज़न प्राइम मेंबर्स के लिए शुरू हुई सेल, मिल रही हैं ये शानदार डील्स - NDTV India     |       salman khan father salim khan becomes horse for his grandson ahil as video goes viral - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       सारा अली खान की वजह से परेशान हुए बोनी कपूर, हो रही है बेटी जाह्नवी की चिंता - Hindustan     |       Film Wrap: मणिकर्णिका के निर्माता को आया स्ट्रोक, उरी ने कमाए इतने - आज तक     |       क्रिकेटर युवराज सिंह की पत्नी हेजल कीच का खुलासा, डिप्रेशन के बाद यूं बदली जिंदगी - Times Now Hindi     |       क्रिकेट/ अमला ने तोड़ा कोहली का रिकॉर्ड, सबसे कम पारियों में लगाए 27 शतक - Dainik Bhaskar     |       ऑस्ट्रेलियन ओपन/ फेडरर उलटफेर का शिकार, 15वीं रैंकिंग वाले सितसिपास से हारे; नडाल की जीत - Dainik Bhaskar     |       ऑस्ट्रेलिया से वनडे सीरीज़ जीतने के बाद, ये मैच देखने पहुंचे विराट कोहली, फोटो हुई वायरल - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       'मिशन न्यूजीलैंड' के लिए ऑकलैंड पहुंची टीम इंडिया, हुआ जोरदार स्वागत, BCCI ने पोस्ट किया VIDEO- Amarujala - अमर उजाला     |      

फीचर


भूख  से मौत रोक पाने में सरकारी योजनाएं नाकाम 

भारत में भूख एक गंभीर समस्या शुरू से रही है और हाल के दशकों में हमने इस समस्या का सबसे अमानवीय रूप देखा है।


death-of-hunger-hunger-index-aadhar-card-jharkhand-poverty-government-scheme

पिछले तीन दशक में ग्लोबल विकास की जिस छतरी के नीचे बैठकर भारत सहित पूरी दुनिया अपनी प्रगति और समृद्धि के सुलेख लिख रही है, उसका विरोधाभासी तथ्य अब हर तरफ जाहिर हो रहा है। विकास के हर दावे के साथ अब यह सफाई जोड़ने की जरूरत पड़ती है कि विकास का चरित्र समावेशी नहीं होने से ग्लोबलाइजेशन के दौर में दुनिया में अमीर-गरीब का फासला खतरनाक तौर पर बढ़ा है। बीते दिनों जब यह खबर आई कि झारखंड के सिमडेगा ज़िले में रहने वाली संतोषी की मौत भूख से हो गई तो उसमें मौत से ज्यादा चिंता पैदा करने वाली बात थी उसकी वजह। संतोषी की मां कोयली देवी का कहना है कि उनकी बेटी की मौत भूख से और सरकारी राशन नहीं मिलने से हुई है। इस खबर को लेकर चल रही चर्चा और राजनीति अभी ठंडी भी नहीं हुई कि झारखंड से ही एक और मौत की खबर आ गई। वजह फिर से एक बार भूख-गरीबी और इसे दूर करने वाली सरकारी योजनाअों की नाकामी बताई गई।

वैसे झारखंड से मौत की यह खबर कोई आपवादिक नहीं है। भारत में भूख एक गंभीर समस्या शुरू से रही है और हाल के दशकों में हमने इस समस्या का सबसे अमानवीय रूप देखा है। मई 2016 में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में नत्थू नामक एक 48 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। नत्थू कई दिनों से प्रदेश सरकार द्वारा वितरित किए जा रहे खाद्य पैकेट को प्राप्त करने का प्रयास कर रहा था। वह पांच दिन से भूखा था। 7 नवंबर 2015 को इलाहाबाद की बारा तहसील के गीज पहाड़ी गांव में मुसहर जाति के 35 वर्षीय समरजीत उर्फ तोताराम और उसकी सात वर्षीय बेटी राधा की भूख से मौत हो गई। पीयूसीएल की एक फैक्ट फाइंडिंग टीम ने पाया कि इलाके के मुसहरों की किसी प्रकार की जीविका आधार तकरीबन खत्म हो गया है। इन तमाम मामलों में प्रशासन और सरकार की पहली प्रतिक्रिया यही रही कि ये मौतें भूख के बजाय अन्य वजहों से हुईं, जबकि स्वतंत्र जांच में यह दावा गलत पाया गया। 

साफ है कि देश में भूख की स्याह सच्चाई अब ज्यादा खतरनाक शक्ल ले चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में समावेशी विकास के सरकारी प्रयासों का नतीजा इतना भर है कि इस साल भारत 119 देशों के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में तीन पायदान नीचे खिसककर 100 स्थान पर पहुंच गया है। गत वर्ष भारत इस इंडेक्स में 97वें पायदान पर था। भूख के मामले में भारत उत्तर कोरिया, बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों से भी पीछे है। समूचे एशिया में सिर्फ अफगानिस्तान और पाकिस्तान भारत से पीछे हैं। इस इंडेक्स में चीन 29, नेपाल 72, म्यांमार 77, श्रीलंका 84 और बांग्लादेश 88वें स्थान पर हैं, जबकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान क्रमश: 106वें और 107वें पायदान पर हैं। अगले दो दशक के भीतर विश्व शक्ति बनने की कामना करने वाला देश मनरेगा और खाद्य सुरक्षा के लिए चलाई जा रही तमाम सरकारी योजनाओं के बावजूद अगर भूख से मौत की नींद सोते अपने नागरिकों को नहीं बचा पा रहा है, तो यह शर्मनाक तो है ही, साथ ही यह एक जरूरी सबक भी है, जिसे देश को अब समय रहते सीख लेना चाहिए। 

बात सिमडेगा में हुई मौत की करें तो मीडिया में जो खबरें हैं, उसके मुताबिक मार्च 2017 में मुख्य सचिव ने राज्य के सभी उपायुक्तों संग वीडियो कांफ्रेंसिंग कर ऐसे राशन कार्डों को रद्द कर देने को कहा था, जो आधार कार्ड से जुड़े न हों। यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सरासर उल्लंघन था। मुख्य सचिव के इस निर्देश पर खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग ने आपत्ति भी जताई थी, पर यह एतराज अनसुना रह गया। 

दरअसल, देश में यह प्रवृति बहुत तेजी से पनपी है कि सरकारें और सियासी जमाते यह मानने लगी हैं कि विकास अब हर चुनाव का कोर एजेंडा है। नतीजतन अपने प्रदर्शन को बेहतर दिखाने के लिए सरकारें किसी भी नीति को इस तरह डिजाइन करती हैं, जिससे वह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। आंकड़ों की बाजीगरी में विकास का श्रेय लेने वाली सरकारें चालाकी यह करती हैं कि वह लाभ की अर्हता रखने वालों की संख्या को तमाम तकनीकी बंदिशों में उलझाकर इतना कम कर देती हैं कि उनके लिए योजना की सफलता का दावा आसान हो जाता है। 

बात आधार कार्ड की करें तो इसकी अनिवार्यता को लेकर अब भी देश में बहस की स्थिति है। भारत सरकार अपनी तरफ से इसे विकास के डिजिटल दौर की दरकार भले बता रही हो पर हकीकत यह है कि आधार योजना ने अपने शुरुआती दौर से ही एक संरचनागत बहिष्करण को जन्म दिया है। इससे जन कल्याणकारी नीतियों का लाभ लेने से भारत की गरीब जनसंख्या एक बड़ा हिस्सा बहिष्कृत हो गया है।  बहिष्करण की यह सच्चाई राशन बंटवारे के मामले से लेकर मनरेगा और पुनर्वास के अनगिनत मामलों में भी देखी जा सकती है।  

 

advertisement