कर्नाटक का 'नाटक' LIVE: बीजेपी बोली- 2 दिन में गिर जाएगी सरकार, कांग्रेस ने बुलाई 18 जनवरी को विधायकों की बैठक - NDTV India     |       ब्रेक्जिट डील गिरने से मुश्किल में घिरीं टेरीजा मे, जा सकती है कुर्सी - News18 इंडिया     |       Mayawati's multi-layered birthday cake looted in Amroha, video goes viral - Watch - Times Now     |       सरकारी स्कूलों की रिपोर्ट/ 8वीं के 56% छात्रों को बेसिक गणित नहीं आती, 27% पढ़ नहीं पाते - Dainik Bhaskar     |       विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष विष्णु हरि डालमिया का निधन - आज तक     |       Kumbh: मकर संक्रांति पर संगम स्नान को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, आंकड़ा डेढ़ करोड़ के करीब - दैनिक जागरण     |       Kumbh Mela 2019 Shahi Snan: Union Minister Smriti Irani takes a dip in Ganges - Times Now     |       महबूबा ने कश्मीरी आतंकियों को माटी का सपूत बताया, कहा- केंद्र उनके नेताओं से बात करे - Dainik Bhaskar     |       World Bank अध्‍यक्ष की रेस में ये भारतीय महिला, दुनिया मानती है लोहा - आज तक     |       नैरोबी के पांच सितारा होटल में आतंकी हमला, 11 लोगों की मौत - Dainik Bhaskar     |       चीन की अंतरिक्ष एजेंसी ने चांद पर उगाना शुरू किया कपास, ऐसे उगाए जा रहे पौधे - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       खौफ के 88 दिन: बंधक के कब्जे से छूटी लड़की ने बताया किडनैपर ने क्या किया - नवभारत टाइम्स     |       बाजार शानदार तेजी लेकर बंद, निफ्टी 10880 के पार टिका - मनी कॉंट्रोल     |       पेट्रोल हुआ सस्ता, लेकिन आज प्रमुख शहरों में बढ़ गए डीजल के दाम - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       IBPS: कैलेंडर घोषित, देखें- 2019-20 में कब-कब होगी परीक्षा - आज तक     |       ₹399 के रिचार्ज प्लान में रोज मिलेगा 3.21GB डेटा, 74 दिन होगी वैलिडिटी - Navbharat Times     |       पहले भी कमेंट कर चुके हैं हार्दिक - बॉलीवुड भास्कर     |       प्रिया प्रकाश ने बताया फ़िल्म Sridevi Bungalow का सच, भड़के फ़ैंस ने उड़ाईं धज्जियां - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       Manikarnika Bharat song launch: कंगना-अंकिता की बॉन्डिंग - आज तक     |       दीपिका पादुकोण के एक्स ब्वॉयफ्रेंड को मिला नया प्यार, अगले महीने ही कर लेंगे शादी- Amarujala - अमर उजाला     |       India vs Australia 2nd ODI: Virat Kohli, MS Dhoni shine as visitors level three-match series 1-1 - Times Now     |       ind vs aus odi series: अजहर ने कहा- अगर ऐसा रहा तो 100 सेंचुरी मारेंगे विराट कोहली - Hindustan     |       Harry Kane to miss Tottenham Hotspur vs Watford, as could Heung-min Son - Watford Observer     |       'I'm going in the right direction': Serena dismisses Maria in Melbourne - WTA Tennis     |      

राजनीति


हिमाचल चुनाव में तिब्बती विभाजित, बोले- मतदान बनाएगा हमें कमजोर

बता दें कि अंकड़ो के मुताबिक धर्मशाला में लगभग 1000 तिब्बती मतादाता हैं। नौ नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार इस छोटे से हिस्से को नजरअंदाज नहीं कर सकते और कुछ दिग्गज नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा इस चुनाव को और कड़ा कर दिया है।


dharamsala-tibetans-divided-over-voting-in-himachal-elections

धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में तिब्बती लोग कई बरसों से रह रहे हैं लेकिन वह लोग आज भी भारत में मतदान नहीं करते हैं। इन तिब्बतियों का मानना है कि भारत में मतदान करना आजादी के लिए किए गए  उनके संघर्ष के महत्व को कमजोर कर देगा।वहीं दूसरे लोगों का कहना है कि तिब्बत आंदोलन उनके दिलों में है और मतदान उन्हें अपने संघर्ष को सहेजने से नहीं रोक सकता।

बता दें कि अंकड़ो के मुताबिक धर्मशाला में लगभग 1000 तिब्बती मतादाता हैं। नौ नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार इस छोटे से हिस्से को नजरअंदाज नहीं कर सकते और कुछ दिग्गज नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा इस चुनाव को और कड़ा कर दिया है। इस सीट पर मुख्य उम्मीदवार कांग्रेसी नेता और शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा और बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री किशन कपूर हैं। वहीं  गोरखा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले निर्दलीय उम्मीदवार रविंद्र राणा, ब्रिटेन से भारत आए पत्रकार विकास चौधरी और एनएसयूआई की पृष्ठभूमि से जुड़े पंकज कुमार चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं।

गौरतलब है कि गोरखा समुदाय कांग्रेस का एक पारंपरिक वोट बैंक रहा है, जो इस विधानसभा क्षेत्र में पर्याप्त रूप से उपस्थित है। राणा भी गोरखा समुदाय से आते हैं और ऐसी संभावना है कि कांग्रेस नेता शर्मा का गणित बिगाड़ सकते हैं। कुमार भी उनकी संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं।  कपूर की गद्दी समुदाय पर अच्छी पकड़ है। गद्दी मतदाताओं की संख्या विधानसभा में लगभग 15000 के आसपास है। धर्मशाला विधानसभा में लगभग 69,000 मतदाता है। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार चौधरी कांग्रेस और बीजेपी के बजाए खुद को सबसे अच्छा विकल्प पेश कर निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं को लुभाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

हालांकि चौधरी ने बर्मिंघम विश्वविद्यालय से मानविकी का अध्ययन किया है और उन्होंने दावा किया है कि 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान उन्होंने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की मुख्य टीम के साथ काम किया था। वह एक ट्रैक्टर पर प्रचार कर मतदाताओं को आकर्षित कर रहे हैं। ट्रैक्टर उनका चुनाव चिन्ह भी है। इन पांच प्रमुख उम्मीदवारों के अलावा सात अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों की उपस्थिति ने चुनावी जंग को दिलचस्प बना दिया है। 2012 के विधानसभा चुनाव में शर्मा ने कपूर को 5000 वोटों से हराया था। वहीं सीएम वीरभद्र सिंह के करीबियों में शुमार शर्मा अपने विकास कार्यो के दम पर जनता के बीच वोट मांग रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके प्रयासों के कारण ही हिमाचल प्रदेश में केंद्रीय विश्वविद्यालय और एक आईटी पार्क को मंजूरी मिली है, लेकिन कपूर ने एक पोस्टर के जरिए उनसे कहा है कि ये वास्तविकता में कब तब्दील होंगे?

तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग के अनुसार विधानसभा चुनाव से पहले 1,000 तिब्बतियों ने मतदाता के रूप में खुद को पंजीकृत कराया है। इस करीबी चुनावी जंग में यह 1000 तिब्बती मतदाता पहली बार अपना वोट डालेंगे। इनका मत विधायक का चुनाव करने में निर्णायक साबित हो सकता है। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) ने तिब्बती समुदाय को अपनी पसंद पर वोट डालने का निर्णय छोड़ा है, जिस कारण समुदाय विभाजित नजर आ रहा है। सीटीए के लिए चुनाव आयोग की एक अधिकारी फुर्बु तोलमा ने अपनी आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि मतदान स्वतंत्र तिब्बत के लिए चल रहे उनके संघर्ष को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि हम वापस जाना चाहते हैं। मतदान का अधिकार हमारे संघर्ष को प्रभावित करेगा, लेकिन सीटीए के एक अधिकारी थिन्ले जाम्पा और एक सामाजिक कार्यकर्ता रिंचेन ग्याल का एक अलग दृष्टिकोण हैं।

तिब्बत युनाइटेड सोसाइटी चलाने वाले जाम्पा ने बताया कि मतदान के जरिए हम भारतीयों के साथ घुल मिल जाएंगे और उन्हें हमारे संघर्ष के बारे में बताएंगे। यह हमें भटका नहीं सकता है। तिब्बत की स्वतंत्रता की दौड़ जारी रहेगी। नियम के तहत 1950 से 1987 के दौरान भारत में जन्मे सभी तिब्बतियों को मतदान का अधिकार प्राप्त करने की अनुमति हैं। इन चुनावों में उनकी महत्वता को इस बात से समझा जा सकता है कि आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने 4 नवंबर को धर्मशाला में तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के साथ एक घंटे की लंबी बैठक की थी। जिसका मकसद सामुदायिक वोटों को लुभाने का था।

advertisement

  • संबंधित खबरें