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राजनीति


क्या भाजपा के इन इरादों की भनक नीतीश को लग चुकी है, आखिर लालू व राहुल से क्यों मिले पीके?

सूत्र बताते हैं कि पीके ने सबसे पहले लालू यादव से मुलाकात की और उनसे नीतीश सरकार के लिए समर्थन मांगा, यह कहते हुए कि अगले बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी का समर्थन कर सकते हैं


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बिहार में सियासी हवा बदल रही है। दोस्त दुश्मन बन सकते हैं। सूत्रों के अनुसार दिसंबर आते-आते भाजपा बिहार की नीतीश सरकार से अपना समर्थन वापिस ले सकती है और भाजपा चाहती है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ ही बिहार विधानसभा चुनाव संपन्न हो जाए।

ऐसा नहीं है कि नीतीश को इन भगवा इरादों की भनक नहीं है, 2019 के आम चुनाव को लेकर वे अभी से अपनी नई रणनीति बुनने में जुट गए हैं। 

पटना के सियासी गलियारों से ऐसी फुसफुसाहट सुनने को मिल रही है कि नीतीश प्रशांत किशोर में अपने उत्तराधिकारी का अक्स देख रहे हैं, शायद यही वजह है कि ब्राह्मण जाति से ताल्लुक रखने वाले पीके अपना सब काम-धाम छोड़कर नीतीश के साथ लग गए हैं। 

सूत्र बताते हैं कि पीके ने सबसे पहले लालू यादव से मुलाकात की और उनसे नीतीश सरकार के लिए समर्थन मांगा, यह कहते हुए कि अगले बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी का समर्थन कर सकते हैं। 

लालू को भी अब लगने लगा है कि काठ की सियासी हांडी को महत्त्वाकांक्षाओं की आंच पर बार-बार परखना ठीक नहीं रहेगा, सो उन्होंने घुमा-फिरा कर एक तरह से पीके को मना कर दिया।

यह कहते हुए कि अब उनकी पार्टी राजद में सभी अहम निर्णय तेजस्वी ही लेते हैं और उनके पुत्र किसी कीमत पर नीतीश को दुबारा समर्थन नहीं दे सकते, सो बात आई-गई हो गई। 

पर पीके भी हार मानने वालों में से नहीं हैं, जब उन्होंने देखा कि लालू नीतीश सरकार को बाहर से भी समर्थन देने को राजी नहीं हैं तो उन्होंने अपने पुराने रिश्तों का वास्ता देकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने का समय ले लिया। 

सूत्र बताते हैं कि पीके ने राहुल के समक्ष एक नया सियासी फार्मूला उछाला और उनसे कहा कि नीतीश अपनी पार्टी जदयू का विलय कांग्रेस में करने को तैयार हैं बशर्त्ते राहुल इस बात का आश्वासन दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश ही महागठबंधन के सीएम फेस होंगे। 

कहा जाता है कि पीके ने राहुल से यह भी कहा कि अगर जदयू का कांग्रेस में विलय हो जाता है तो इतने वर्षों बाद बिहार में कांग्रेस विधायकों की संख्या 100 के पार चली जाएगी। 

पीके की बातों से आश्वस्त राहुल ने फौरन तेजस्वी को फोन मिलाया और पीके का यह फार्मूला सुझाया, पर तेजस्वी ने एक झटके में ’ना’ कह दिया, अब राहुल की तरह नीतीश भी अपने सियासी भविष्य को लेकर बेहद सशंकित हैं, और आरसीपी गैंग भी विद्रोह की नई इबारत लिखने में जुटा है, ऐसे में जाने क्या होगा नीतीश का? 
 

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