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जीएसटी: 177 वस्तुओं पर अब 28 की जगह 18 फ़ीसदी टैक्स

गौरतलब है कि अभी तक 227 वस्तुएं 28 फ़ीसदी वाले टैक्स स्लैब में थीं। जीएसटी कौंसिल इसका औपचारिक एलान शाम को करेगी।


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जीएसटी कौंसिल आज गुवाहाटी में चल रही बैठक में बड़ा फैस्ल्का लेते हुए क़रीब 177 वस्तुओं पर टैक्स 28 फ़ीसदी की जगह 18 फ़ीसदी कर दिया है। अब सिर्फ 50 सामानों पर 28 फ़ीसदी कर लगेगा। गौरतलब है कि अभी तक 227 वस्तुएं 28 फ़ीसदी वाले टैक्स स्लैब में थीं। वहीं, सभी रेस्तरां जोकि पांच सितारा होटल से बाहर हैं, उन पर कर की दर 5 फीसदी तय कर दी गई है। हालांकि उन्हें इनपुट क्रेडिट का लाभ नहीं मिलेगा। 

सस्ती हुई वस्तुओं में सौंदर्य प्रसाधन की कई चीजों सहित शैम्पू, डियोड्रेंट, मार्बल, डिटर्जेंट, शेविंग क्रीम, आफ्टर शेव, चॉकलेट, टूथपेस्ट, जूता-पोलिश, सैनेटरी, सूटकेस, वॉलपेपर्स, प्लाईवुड, स्टेशनरी आर्टिकल, वाशिंग पाउडर, प्लेइंग इंस्ट्रूमेंट्स और घड़ी आदि सामान शामिल हैं। जबकि पेंट और सीमेंट, वाशिंग मशीन और एयर कंडीशनर्स जैसे लग्जरी गुड्स को 28 फीसदी के ब्रैकट में ही रखा गया है।

दो दिवसीय लंबी बैठक के बाद वित्त मंत्री ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "वस्तु एवं सेवा कर परिषद (जीएसटी) ने 178 वस्तुओं को 28 फीसदी के कर दायरे से बाहर कर दिया है और अब इन वस्तुओं को 18 फीसदी के कर दायरे में लाया गया है। यह इस महीने की 15 तारीख से लागू होगा।" उन्होंने कहा, "दो वस्तुओं के कर दायरे को 28 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी कर दिया गया है।"

जीएसटीएन पैनल के अध्यक्ष और जीएसटी कौंसिल के सदस्य सुशील मोदी ने कहा है कि उपभोक्ताओं के आम इस्तेमाल वाली चीज़ों पर टैक्स घटाया गया है। जीएसटी कौंसिल की मीटिंग में वित्त मंत्री अरुण जेटली सहित 24 राज्यों के वित्त मंत्री और जीएसटी के प्रभारी मंत्रियों ने हिस्सा लिया। जीएसटी के 28 फीसदी स्लैब में अब केवल 50 उत्पाद होंगे, जिनमें व्हाइट गुड्स, सीमेंट और पेंट्स, वाहन, हवाई जहाज और मोटरबोट शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने इससे पहले संवाददाताओं से कहा था कि जल्दबाजी और गलत तरीके से डिजायन किए जाने के कारण पहले तीन महीनों में केंद्र सरकार को 60,000 करोड़ रुपये तथा राज्यों को 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। 

नवीनतम फैसले में, जीएसटी के अंतर्गत लोगों द्वारा समान्य तौर पर उपभोग (मास कंजम्पशन) की जाने वाली वस्तुएं जिनकी राजस्व महत्ता ज्यादा नहीं है, जैसे चॉकलेट, शेविंग सामग्री, शेंपू, स्कीन क्रीम के कर दायरे को घटा दिया गया है। 

अब महंगे होटलों को छोड़कर सभी किस्म के रेस्तरां में खाना सस्ता हो जाएगा। इन पर अब 5 फीसदी कर लगाया जाएगा। हालांकि इन्हें अब इनपुट क्रेडिट नहीं दिया जाएगा। जेटली ने कहा कि ये ग्राहकों को इनपुट क्रेडिट का लाभ नहीं दे रहे थे, इसलिए यह सुविधा नहीं दी जाएगी। 

जिन होटल के कमरों का किराया 7,500 रुपये या उससे अधिक है, वहां के रेस्तरांओं को 18 फीसदी की दर से जीएसटी चुकाना होगा, साथ ही उन्हें इनपुट क्रेडिट का लाभ भी मिलेगा।

जीएसटी परिषद ने इसके अलावा रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया में छोटे करदाताओं के लिए अनुपालन का बोझ कम किया है। अब 31 मार्च 2018 तक जीएसटीआर 3बी दाखिल किया जा सकेगा। 

वित्त सचिव हंसमुख अधिया ने संवाददाताओं को बताया, "सभी करदाताओं को जीएसटीआर 3बी दाखिल करना होगा। हालांकि छोटे कर दाताओं या शून्य कर चुकाने वालों के लिए इसे सरल बनाया गया है। ताकि वे दो या तीन चरणों में अपना रिटर्न दाखिल कर सकें।"

उन्होंने बताया कि परिषद ने यह भी निर्णय लिया कि इस वित्तीय वर्ष के लिए केवल जीएसटी 1 भरा जाएगा और क्योंकि हम बैकलॉग में चल रहे हैं - जहां हम 11 जुलाई तक केवल जुलाई के लिए रिटर्न दाखिल करेंगे।

उन्होंने कहा, "1.5 करोड़ से अधिक कारोबार करने वाले करदाताओं के लिए जिनके पास इनवायस की बड़ी संख्या है। हम नहीं चाहते कि उनका रिटर्न एक तिमाही तक लंबित रहे। इसलिए उन्हें अपना इनवायस मासिक दाखिल करना चाहिए।"

अधिया ने यह भी कहा कि रिटर्न को सरल बनाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जो खरीद विवरण को जीएसटीआर 2 के तहत तथा इनवायस के मिलान को जीएसटीआर 3 के अंतर्गत रखने पर काम कर रही है। 

परिषद ने यह भी फैसला किया है कि 'शून्य' करदाता के लिए देर से रिटर्न दाखिल करने का शुल्क अब 20 रुपये रोजाना होगा, जो पहले 200 रुपये रोजाना था और अन्य के लिए इसे कम कर 50 रुपये रोजाना कर दिया गया है। 

परिषद ने रियल एस्टेट को जीएसटी के अंतर्गत लाने पर फिलहाल फैसले को अगली बैठक तक के लिए टाल दिया है, क्योंकि उनके पास समय कम था।

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