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फीचर


लक्ष्यहीन होना ही दृष्टिहीन होने से बुरा

इतिहास में विकलांगता के बावजूद अनुपम उपलब्धियां हासिल करने वाली महान विभूतियों की कमी नहीं, परंतु दृष्टिहीनता एवं बधिरता जैसी दोहरी विकलांगता के बावजूद न केवल अपना जीवन सफल बनाया


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एक यूनानी कहावत है कि दुनिया उतनी ही है, जितनी आपके आंखों के आगे है। महान यूनानी दार्शनिक सुकरात ने इस कहावत को अपनी तरह से बदला और कहा कि आंखें हैं तो जहान है। वैसे सुकरात ने इस बात को दार्शनिक अंदाज में कहा था, पर इस बात से कौन इंकार कर सकता है कि दृष्टि बाधित लोगों के लिए जीवन की चुनौतियां आम लोगों के मुकाबले काफी बढ़ जाती है। वैसे आम अनुभव यह बताता है कि दृष्टि बाधित लोगों में जहां गजब की बोधगम्यता होती है, वहीं वे कुछ असामान्य किस्म के गुणों से संपन्न होते हैं।

इतिहास में विकलांगता के बावजूद अनुपम उपलब्धियां हासिल करने वाली महान विभूतियों की कमी नहीं, परंतु दृष्टिहीनता एवं बधिरता जैसी दोहरी विकलांगता के बावजूद न केवल अपना जीवन सफल बनाया, बल्कि अपने जैसे लाखों लोगों के लिए भी कार्य कर सबके लिए प्रेरक मिसाल बन जाने वाले व्यक्तियों के उदाहरण के रूप में हेलेन केलर का नाम प्रमुखता से आता है। ‘दृष्टिहीनों की प्रगति में मुख्य बाधा दृष्टिहीनता नहीं, बल्कि दृष्टिहीनों के प्रति समाज की नकारात्मक सोच है’- यह वक्तव्य उसी महान स्त्री हेलेन केलर के हैं, जिन्होंने दृष्टिहीन एवं बधिर होने के बावजूद अध्ययन, लेखन एवं रचनाशीलता से अन्य क्षेत्रों में अद्भुत मिसाल कायम की। हेलेन के शब्दों में यूनानी कहावत को कहेंगे तो कहना होगा कि दृष्टिहीन होने से ज्यादा खतरनाक है, लक्ष्यहीन होना।

दिव्यांगता के बावजूद उनकी विलक्षण प्रतिभा से प्रभावित होकर विंस्टन चर्चिल ने हेलेन को अपने युग की सर्वाधिक महान स्त्री की संज्ञा दी थी। हेलन केलर का पूरा नाम हेलेन एडम्स केलर है। उनका जन्म संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित अलबामा प्रांत के उत्तर-पश्चिमी इलाके के छोटे से कस्बे टसकम्बिया में 27 जून 1880 को हुआ था| मात्र 19 माह की आयु में उन्हें एक ऐसी बीमारी ने जकड़ लिया, जिसका इलाज उन दिनों संभव नहीं था और जिसके परिणाम स्वरूप एक दिन उनकी मां को यह अहसास हुआ कि उनकी नन्ही बच्ची की दृष्टि एवं श्रव्य-शक्ति जा चुकी है। उनकी बीमारी इस हद तक गंभीर हो चुकी थी कि उनके माता-पिता को हेलेन का बचना असंभव लगता था। दृष्टि एवं श्रव्य-शक्ति खोने के बाद हेलेन का बचपन न केवल संघर्षपूर्ण, बल्कि कष्टमय भी हो गया था। वह काफी चिड़चिड़ी एवं तुनकमिजाज भी हो गई थीं| एक अच्छे विशेषज्ञ डॉक्टर ने हेलेन को कुछ दिनों तक देखने पर पाया कि वे अपने रसोइए के इशारों को आसानी से समझ लेती थीं। डॉक्टर ने हेलेन को मूक-बधिर बच्चों के विशेषज्ञ एक स्थानीय व्यक्ति से मिलने की सलाह दी| ये विशेषज्ञ थे- अलेक्जेंडर ग्राहम-बेल, जिन्होंने टेलीफोन का आविष्कार किया था| बेल ने उन्हें पर्किन्स इंस्टीट्यूट फॉर द ब्लाइंड जाने की सलाह दी।

इस तरह जीवन के संघर्षों के बीच से रास्ता निकालते हुए हेलेन एक विश्व-प्रसिद्ध वक्ता एवं लेखक बनीं | हेलेन केलर की लिखी कुल 12 पुस्तकें एवं कई आलेख प्रकाशित हुए| उन्होंने दृष्टिहीनों के लिए समर्पित संस्था के लिए 44 वर्षों तक काम किया| विकलांगों की सहायता के लिए उन्होंने विश्व के 39 देशों की यात्रा की| उनके मित्रों एवं प्रशंसकों की सूची में मार्क ट्वेन, विंस्टन चर्चिल, चार्ली चैपलिन जैसे विश्वविख्यात नाम शामिल हैं| हेलेन केलर से एक बार पूछा गया कि दृष्टिहीन होने से भी बुरा क्या हो सकता है, तब उन्होंने कहा था, ‘लक्ष्यहीन होना दृष्टिहीन होने से भी बुरा है| यदि आपको अपने लक्ष्य का पता नहीं है तो आप कुछ नहीं कर सकते हैं|’

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