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भूमि पूजन की अवधारणा को विज्ञान विरोधी बताने पर भड़के केंद्रीय मंत्री, क्या विज्ञान सम्मत है भूमि पूजन?

सूत्रों की मानें जब भूमि पूजन के लिए मंत्री जी संस्थान पहुंचे तो पाया कि संस्थान के बाहरी दीवारों पर तमाम पोस्टर चिपके थे, जिसमें भूमि पूजन की अवधारणा को विज्ञान विरोधी बताया गया था और पोस्टर चीख-चीखकर कह रहे थे कि विज्ञान ऐसे किसी भूमि पूजन के औचित्य को चुनौती देता है


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देश भर में विज्ञान की संस्कृति के प्रचार-प्रसार में जुटी कोलकाता की एक संस्था को केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सौजन्य से भूमि आबंटित हुई ताकि यह प्रतिष्ठित संस्थान उस जमीन पर अपनी नई इमारत खड़ी कर सके।

यह एक पुराना संस्थान है जिसकी स्थापना प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस ने स्वतंत्रता प्राप्ति से भी कहीं पहले की थी। यह स्टर्लिंग बोस इंस्ट्टीयूट, कोलकाता के साल्ट लेक एरिया में अवस्थित है।

भूमि पूजन का कार्यक्रम तय हो गया और इसमें भाग लेने केंद्रीय मंत्री हर्षवर्द्धन कोलकाता भी पहुंच गए।

सूत्रों की मानें जब भूमि पूजन के लिए मंत्री जी संस्थान पहुंचे तो पाया कि संस्थान के बाहरी दीवारों पर तमाम पोस्टर चिपके थे, जिसमें भूमि पूजन की अवधारणा को विज्ञान विरोधी बताया गया था और पोस्टर चीख-चीखकर कह रहे थे कि विज्ञान ऐसे किसी भूमि पूजन के औचित्य को चुनौती देता है।

नाराज मंत्री ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों से जानना चाहा कि क्या इस संस्थान का निदेशक कोई वामपंथी रूझान वाला व्यक्ति है, अगर है तो उसे बाहर का रास्ता दिखाओ।
 

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