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नोटबंदी के बाद 17 हज़ार करोड़ जमा कराया, फिर निकाल लिया

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों से वित्तीय विवरण न भरने वाले 3.09 लाख कंपनी बोर्ड निदेशकों को अयोग्य घोषित कर दिया है।


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भारत सरकार ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ बड़ा अभियान चलाते हुए 2 साल या उससे अधिक समय से निष्क्रिय रहने वाली 2.24 लाख कंपनियों को बंद कर दिया है। साथ ही इनके इनके बैंक खातों पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी है।

सरकार ने 56 बैंकों से प्राप्त हुई सूचना के आधार पर 35000 कंपनियों के 58000 खातों को खंगाला तो पता चला कि नोटबंदी  के बाद 17000 करोड़ रूपये से अधिक की राशि इन खातों में जमा कराई गई थी और बाद में वापस निकाल लिया गया था।

इसी में से एक कंपनी का मामला तो और भी रोचक है। दरअसल उसके खाते में 8 नवंबर, 2016 को शुरुआती बैलेंस ऋणात्म।क यानी निगेटिव था। और नोटबंदी के बाद उस खाते में 2,484 करोड़ रुपये जमा कराये गए, फि‍र वापस निकाल लिए गए। वहीँ एक अन्य कंपनी के क़रीब 2,134 खाते होने के बारे में जानकारी मिली है।

बैंक खातों के संचालन पर प्रतिबंध लगाने के अलावा बंद कर दी गई इन समस्त, कंपनियों की चल एवं अचल संपत्तियों की बिक्री और हस्तांतरण पर तब तक के लिए पाबंदी लगाने की कार्रवाई भी की जा चुकी है जब तक कि उनके कामकाज की बहाली नहीं हो जाती है। राज्य सरकारों को सलाह दी गई है कि वे इस तरह के लेन-देन के पंजीकरण को नामंजूर करके इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करें।

इस तरह की कंपनियों के बारे में मिली जानकारियों को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी), वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू), वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इत्यादि सहित प्रवर्तन अधिकारियों के साथ साझा किया गया है, ताकि आगे और आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

सरकार के अनुसार कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत छानबीन के लिए भी अनेक कंपनियों की पहचान की गई है और इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता से ऐसी गलत (डिफॉल्टिंग) कंपनियों के खिलाफ चलाए गए अभियान की निगरानी के लिए राजस्व सचिव और कॉरपोरेट मामलों के सचिव की संयुक्त अध्यक्षता में एक विशेष कार्य बल का गठन किया है।

इसके अलावा, 2013-14 से लेकर 2015-16 तक के तीन वित्त वर्षों की निरंतर अवधि के दौरान वित्तीय विवरण या वार्षिक रिटर्न दाखिल करने में विफल रही कंपनियों के बोर्ड में शामिल 3.09 लाख निदेशकों को अयोग्य करार दे दिया गया है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि 3,000 से अधिक अयोग्य निदेशकों में से प्रत्येक 20 से अधिक कंपनियों में निदेशक हैं, जो कानून के तहत निर्धारित सीमा से अधिक है।

इसी तरह नियामक तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्ये से ‘पूर्व चेतावनी प्रणाली (ईडब्ल्यूएस)’ स्थापित करने हेतु एक अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन विकसित करने के लिए अलग से पहल की जा रही है। यह प्रणाली एसएफआईओ में स्थािपित की जाएगी।

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