सर्जिकल स्ट्राइक के 'हीरो' रहे लेफ्टिनेंट जनरल डी एस हुड्डा ने कांग्रेस में शामिल होने की खबरों को नकारा - NDTV India     |       जम्मू-कश्मीर: उत्तरी कश्मीर के सोपोर में मुठभेड़, दो आतंकी घिरे- Amarujala - अमर उजाला     |       द.कोरिया/ राष्ट्रपति मून के सरकारी आवास में मोदी का औपचारिक स्वागत, प्रधानमंत्री ने सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी - Dainik Bhaskar     |       संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कहा- पुलवामा आतंकी हमला जघन्य और कायराना, जैश का जिक्र - Navbharat Times     |       सपा-बसपा गठबंधन: सीटों कें बंटवारे पर मायावती ने ही लगाई अंतिम मुहर - Hindustan     |       नदियों का पानी रोकने पर बोला पाकिस्तान- भारत के पास हमारे पानी को रोकने की क्षमता नहीं - आज तक     |       बिहार इंजीनियर भर्ती में सनी लियोन के टॉप करने पर सियासी घमासान शुरू, जानें किसने क्या कहा - NDTV India     |       Pulwama Attack : मसूद अजहर ने जारी किया ऑडियो, बोला- जितनी गाली देनी है दे दो मुझे, लेकिन... - Nai Dunia     |       Shoaib Akhtar condemns Pulwama attack; says India have every right to pull out of ICC World Cup 2019 - Times Now     |       PM Modi-Saudi Crown Prince Hold Talks: Congress Slams 'Hugplomacy' - NDTV     |       पाकिस्तान ने सऊदी अरब के युवराज को गिफ्ट की सोने की राइफल - Hindustan हिंदी     |       Kulbhushan Jadhav case: India slams Pak for use of ‘abusive language’ at ICJ, says ‘Islamabad hammers table' - Times Now     |       Reliance Capital Share: अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कैपिटल हिस्सा बेचेगी, शेयर में तेजी - Times Now Hindi     |       शेयर बाजार/ सेंसेक्स 142 अंक की बढ़त के साथ 35898 पर बंद, सरकारी बैंकों के शेयर 20% तक उछले - Dainik Bhaskar     |       I am sure RCom will honour SC verdict, says Mukul Rohatgi after Anil Ambani held guilty in Ericsson case - Times Now     |       मजबूती के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 404 अंक और निफ्टी 131 अंक उछला - Navbharat Times     |       Pulwama terror attack: नवजोत सिंह सिद्धू को बयान देना पड़ा भारी, कॉमेडी शो के बाद अब लगा एक और बैन - Times Now Hindi     |       वायरल हुई मलाइका अरोड़ा की मिस्टर इंड‍िया टीशर्ट, ये है वजह - Entertainment - आज तक     |       लौट रहा है ये रियलिटी शो, कपिल शर्मा... के बाद सलमान खान का दूसरा धमाका - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       अक्षय की केसरी का ट्रेलर देख सेलेब्स बोले- तारीफ के ल‍िए शब्द नहीं - आज तक     |       Sami Khedira not to play for a month after successful heart surgery - Juventus - Times Now     |       Liverpool vs Manchester United: Confident Georginio Wijnaldum says Red Devils not the same team - Times Now     |       क्रिकेट/ कमर की परेशानी के कारण हार्दिक पंड्या ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी-20 और वनडे सीरीज से बाहर - Dainik Bhaskar     |       विश्व कप से बाहर होगा PAK, ICC को पत्र लिखेगा BCCI India to push for removal of Pakistan from world cup - Sports - आज तक     |      

फीचर


बिहारी अस्मिता की पहचान के रूप में बना पटना विश्वविद्यालय

शिक्षा और सरकारी नौकरियों में बहाली के मामलों पर बिहारी लोगों से बहुत ही नाइंसाफी की जाती थी। इसी विभेद को रोकने के लिए पटना विश्वविद्यालय आया अस्तित्व में


patna-university-make-on-identity-of-bihari

1861 तक बिहार में मेडिकल, इंजीनियरिंग की पढ़ाई का कोई भी संस्थान नहीं था और कलकत्ता के मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज मे बिहार के छात्रों को स्कॉलरशिप नहीं मिलता था। शिक्षा और सरकारी नौकरियों में बहाली के मामलों पर बिहारी लोगों से बहुत ही नाइंसाफी की जाती थी।

बिहार के नेताअों ने की पहल
इस तरह के विभेदपूर्ण बर्ताव से तंग आ कर महेश नारायण, अनुग्रह नारायण सिंह, नंद किशोर लाल, राय बहादुर, कृष्ण सहाय, गुरु प्रसाद सेन, सच्चिदानंद सिन्हा, मुहम्मद फ़ख़्रुद्दीन, अली ईमाम, मज़हरुल हक़ और हसन ईमाम सरीखे बिहार के नेताअों को लगा बंगाल से अलग कराने के काम मे लग गए। इस तरह 22 मार्च 1912 को बिहार वजूद में आया। बिहार और उड़ीसा के लिए विश्वविद्यालय की सबसे पहली मांग मौलाना मजहरुल हक ने 1912 मे की थी। उनका मानना था के बिहार और उड़ीसा का अपना एक अलग यूनिवर्सिटी होना चाहिए फिर इस बात का समर्थन सचिदानंद सिन्हा ने भी किया।

लंबी जद्दोजहद
पटना यूनिवर्सिटी बिल को लेकर 1916 के 1917 के बीच लंबी जद्दोजेहद हुई। 1916 में कांग्रेस के लखनऊ सेशन में पटना यूनिवर्सिटी बिल को ले कर बात हुई। इंपीरियल विधान परिषद में 5 सितंबरर 1917 को इस बिल को पेश किया गया, जिसमे वहां मौजूद लोगों से राय मांगी गई, 12 सितंबर 1917 को इस बिल पर चर्चा हुई और मौलाना मजहरुल हक़ द्वारा दिए गए समर्थन के कारण 13 सितंबर 1917 को इस बिल को पास कर दिया गया।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद की चाह
इस विश्वविद्यालय को लेकर यह जानकारी भी दिलचस्प है कि जहां डॉ. राजेंद्र प्रासाद चाहते थे के पटना में क्षेत्रीय यूनिवर्सिटी बने जहां लोकल भाषा में पढ़ाई हो, वहीं सैयद सुल्तान अहमद पटना के यूनिवर्सिटी को विश्वस्तरीय बनवाना चाहते थे और बात सुल्तान अहमद की ही मानी गई। शायद इसी बात को लेकर 1916 में बड़ी तादाद में छात्र पटना में यूनिवर्सिटी बनाने का विरोध कर रहे थे, तब सैयद सुल्तान अहमद ने छात्रों से बात की और उन्हें संतुष्ट किया। इस तरह पटना यूनिवर्सिटी के बनने का रस्ता खुल गया। पटना यूनिवर्सिटी एक्ट 1 अक्तुबर 1917 को पास हुआ और इस तरह पटना यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई।

भारतीय मूल के वाईस चांसलर
पटना यूनिवर्सिटी के पहले भारतीय मूल के वाइस चांसलर सैयद सुल्तान अहमद बने। वे 15 अक्तुबर 1923 से लेकर 11 नवंबर 1930 तक इस पद पर बने रहे। उनके दौर में ही पटना यूनिवर्सिटी में पटना साइंस कॉलेज, पटना मेडिकल कॉलेज और बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज वजुद मे आया जो उनकी सबसे बड़ी उप्लब्धि थी।
ख्वाजा मुहम्मद नूर भारतीय मूल के दूसरे वाईस चांसलर बने, जो 23 अगस्त 1933 से 22 अगस्त 1936 तक इस पद पर बने रहे। पटना यूनिवर्सिटी को स्थापित करने में अपना बड़ा किरदार अदा करने वाले सच्चिदानंद सिन्हा 23 अगस्त 1936 से 31 दिसंबर 1944 तक इसके वाईस चांसलर रहे । उनके बाद सी.पी.एन. सिंह 1 जनवरी 1945 को पटना यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर बने और भारत की आजादी के बाद भी 20 जुन 1949 तक इस पद पर बने रहे। सी.पी.एन सिंह ने ही पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स की शुरुआत पटना यूनिवर्सिटी में की।

मुहम्मद फख्रुद्दीन ने बनवाई इमारतें
पटना विश्वविद्यालय को वजूद मे लाने मे अपना अहम रोल अदा करने वाले मुहम्मद फख्रुद्दीन ने 1921 से 1933 के बीच बिहार के शिक्षा मंत्री रहते हुए पटना यूनिवर्सिटी के कई बिलडिंग और हॉस्टल का निर्मान करवाया। चाहे वो बी.एन कॉलेज की नई ईमारत हो या फिर उसका तीन मंज़िला हॉस्टल, साईंस कॉलेज की नई ईमारत हो या फिर उसका दो मंजिला हॉस्टल, इकबाल हास्टल भी उन्हीं की देन है। रानी घाट के पास मौजूद पोस्ट ग्रेजुएट हॉस्टल भी उन्होंने ही बनवाया। साथ ही पटना ट्रेनिंग कॉलेज की ईमारत भी उन्हीं की देन है। इसी दौरान कई बिहार के कई देसी राजा महराजा और नवाबों ने जमीन और पैसा डोनेट किया जिसके बाद पटना यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग और दफ्तर खुले।

advertisement