total lunar eclipse: 67 मिनट ढक जाएगा पूरा चांद, जानें ग्रहण का टाइम - Hindustan     |       BJP विधायक के बिगड़े बोल, सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा- इन्हें आगरा में भर्ती कराओ– News18 हिंदी - News18 इंडिया     |       UK को पछाड़ देगा भारत, चुनाव से पहले मोदी सरकार की बल्ले-बल्ले! - Business AajTak - आज तक     |       ओडिशा कांग्रेस में संग्राम जारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीकांत जेना को पार्टी ने बाहर निकाला- Amarujala - अमर उजाला     |       कुल्हड़ वाली चाय पी लो... 15 साल बाद फिर रेलवे स्टेशनों में गूंजेगी ये आवाज - आज तक     |       यूनाइटेड इंडिया रैली के लिए कोलकाता में जुटा विपक्ष, मोदी-शाह पर साधा निशाना - BBC हिंदी     |       कर्नाटक: कांग्रेसी विधायकों में रिजॉर्ट में 'मारपीट', एक अस्‍पताल में भर्ती, पार्टी बोली- छाती में दर्द था - News18 Hindi     |       शत्रुघ्‍न सिन्‍हा ने PM मोदी को बताया तानाशाह, झारखंड के भड़के मंत्री ने कहा गद्दार - दैनिक जागरण     |       गए थे तेल चोरी करने, पाइपलाइन में हुआ विस्फोट, लगी आग, 73 लोगों की गई जान, देखें दर्दनाक वीडियो - Times Now Hindi     |       Mauritian Prime Minister Pravind Jugnauth to arrive in India on 8-day visit - Times Now     |       नशे में महिला सैनिक ने पुरुष साथी का किया यौन शोषण, नहीं मिली सजा - trending clicks - आज तक     |       Two Russian fighter jets collide over Sea of Japan - Times Now     |       पेट्रोल-डीजल के दाम में रविवार को हुई भारी बढ़ोतरी, फटाफट जानें नए रेट्स - News18 Hindi     |       अनिल अंबानी के बेटे अंशुल बने कंपनी में ट्रेनी, न्यूयॉर्क से की पढ़ाई - आज तक     |       ऐमजॉन, फ्लिपकार्ट की सेल, जानें क्या है खास - नवभारत टाइम्स     |       मिनी अर्टिगा जैसी दिखती है न्‍यू WagonR, आएगी अलॉय व्‍हील के साथ - Zee Business हिंदी     |       विवादित प्रॉपर्टी को लेकर बेटी सारा के साथ थाने पहुंचीं अमृता सिंह - नवभारत टाइम्स     |       ड‍िप्रेशन का श‍िकार रह चुकी हैं युवराज स‍िंह की वाइफ हेजल, शेयर की पोस्ट - आज तक     |       सारा अली खान की वजह से परेशान हुए बोनी कपूर, हो रही है बेटी जाह्नवी की चिंता - Hindustan     |       'भाबीजी घर पर हैं' कि अनीता भाभी ने शेयर की बेटे की First Photo, 3 दिन पहले हुआ था जन्म - Times Now Hindi     |       क्रिकेट/ अमला ने तोड़ा कोहली का रिकॉर्ड, सबसे कम पारियों में लगाए 27 शतक - Dainik Bhaskar     |       ऑस्ट्रेलियन ओपन/ फेडरर उलटफेर का शिकार, 15वीं रैंकिंग वाले सितसिपास से हारे; नडाल की जीत - Dainik Bhaskar     |       ऑस्ट्रेलिया से वनडे सीरीज़ जीतने के बाद, ये मैच देखने पहुंचे विराट कोहली, फोटो हुई वायरल - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       फेडरर के साथ फोटो पर बुरी फंसीं अनुष्का, इस वजह से हो गईं ट्रोल - Sports - आज तक     |      

राजनीति


बुलेट दागते कुछ सवाल, जिसका जवाब सरकार भी नहीं दे रही

 बुलेट ट्रेन के सपने को भारत में साकार करने का यश लूटते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने तो सभ्यता और विकास की पूरी यात्रा को ही अपनी तरफ से एक तरह से शीर्षासन करा दिया


pm-modi-bullet-train-questions-government-gujarat-india

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुजरात मॉडल अब उनके लिए न्यू इंडिया का विजन बन चुका है। वे इस विजन में तेजी से रंग भरने में लगे हैं। एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की लागत से अहमदाबाद से मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना का आरंभ और इसे अगले पांच साल में पूरा करने का संकल्प प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया की समझ और विवेक को जहां पूरी तरह साफ करता है, वहीं यह कई सवाल भी उठाता है। गुजरात में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा यहां लगातार छठी बार सत्ता में बने रहने की कोशिश में है। यह कोशिश इसलिए भी अहम है क्योंकि भाजपा के लिए गुजरात एक ऐसी प्रयोगस्थली रही है, जहां से उसने केंद्र में बहुमत के साथ सत्ता में आने का सपना पूरा किया है। इस लिहाज से गुजरात में इस बार भाजपा की जीत-हार का खास महत्व है, क्योंकि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी यहां के मु्ख्यमंत्री थे। लिहाजा, जिस तरह जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे दो दिनों के भारत दौरे पर पहुंचे और अपने आगमन के पहले ही अहमदाबाद एयरपोर्ट से शुरू होकर साबरमती आश्रम तक नरेंद्र मोदी के साथ करीब आठ किलोमीटर लंबा रोड शो किया, यह अपने आप बहुत कुछ कह जाता है। खैर तो यह तो रही सत्ता और राजनीति से जुड़ी पीएम मोदी की बुलेट चाल की बात। यहां कुछ और बातें भी गौर करने की हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने आबे के साथ रहते हुए कई बार महात्मा गांधी का जिक्र किया, पर जिस अंदाज में वे अहमदाबाद से मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना के शुरुआत के मौके पर बोल रहे थे, उससे कहीं नहीं लगता कि राष्ट्रपिता का नाम लेकर देश में स्वच्छता अभियान छेड़ने वाले इस महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री को राष्ट्रपिता का वह बुनियादी सबक याद है, जिसमें वे भारी मशीन और बड़ी परियोजनाओं को आजीवन मानव श्रम का अनादर बताते रहे और साथ में यह भी कहते रहे कि इससे कोई और लाभान्वित हो तो हो पर अंतिम जन तक इसकी खुशी नहीं पहुंचेंगी। जो तथ्य रखे गए हैं उसमें बुलेट ट्रेन की परियोजना से 24 हजार लोगों को सीधे रोजगार मिलेंगे और करीब 15 हजार लोग इससे परोक्ष रूप से रोजी-रोटी से जुड़ेंगे। सवाल है कि रोजगार के इस खाली पर महंगे कटोरे को लेकर भारत का कथित स्वाभिमान भले बढ़े पर उसकी थाली में रोटी तो आने से रही।

कमाल यह कि बुलेट ट्रेन के सपने को भारत में साकार करने का यश लूटते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने तो सभ्यता और विकास की पूरी यात्रा को ही अपनी तरफ से एक तरह से शीर्षासन करा दिया। वे कहते-कहते यहां तक कह गए कि वो दौर गया, जब नदियों के किनारे सभ्यताएं विकसित हुआ करती थीं, अब तो वह दौर है जब हाई स्पीड हाईवे और कनेक्टिविटी को देखते हुए नए-नए शहर बसते हैं। नदी, जीवन और सभ्यता के इस नए संबंध और इसकी व्याख्या पर गहराई से विचार करें तो स्किल से लेकर डिजिटल इंडिया तक नारा देने वाले प्रधानमंत्री कहीं न कहीं देश में शहरी सभ्यता और विकास की वह इबारत लिखना चाह रहे हैं, जिसकी चमक के आगे ग्रामीण भारत का अंधेरा दिखाई ही न दे। इसलिए कई राजनीतिक आलोचक यह बात कह भी रहे हैं कि एनडीए के पहले दौर के शासन के बाद मौजूदा दौर में भी विकास को लेकर सरकार की दिशा शाइनिंग इंडिया से जुड़े निहितार्थों की तरफ ही बढ़ रही है।

बुलेट ट्रेन की रफ्तार के साथ देश में विकास का नया रोडमैप खींचने वाले प्रधानमंत्री को यह बताने की जरूरत नहीं कि आज देश में जिन बातों की चर्चा सबसे ज्यादा है, उसमें सबसे अहम हैं बाढ़ से कम कम पांच प्रदेशों में आई भारी तबाही और रेलवे की असुरक्षा का सवाल। इन दोनों ही स्थितियों पर कम से कम सरकार की तरफ से अब तक कोई ऐसी घोषणा या आश्वसन नहीं आया है, जिससे लगे कि जिन वजहों से सैकड़ों लोगों की जानें बीते कुछ अरसे में देश में गई हैं, सरकार ने उसे अपने लिए चुनौती माना है और उससे निपटने के लिए किसी बड़ी कार्ययोजना को हाथ में लिया हो। प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद प्रधानमंत्री ने भले रस्मी तौर पर केंद्र सरकार की तरफ से इस साल भी राहत पैकजों की घोषणा की, पर इससे आगे उन्होंने अपनी तरफ से ऐसी किसी चिंता को जाहिर नहीं किया, जिससे लगे कि उन्हें भी यह लगता है कि न्यू इंडिया की तस्वीर कम से कम ऐसी तो नहीं होनी चाहिए कि लोग बाढ़ में बह जाएं।

इसी तरह बीते एक महीने में तकरीबन हर दूसरे दिन रेल के डिब्बों के पटरियों से उतरने और इस कारण हुई कुछ बड़ी घटनाओं की खबर आई है, उससे तो साफ लग रहा है कि रेलवे महकमा यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर रूप से लापरवाह है। हाल में सबसे बड़ा हादसा 19 अगस्त 2017 को मुजफ्फरनगर के खतौली में हुआ, जहां कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे में करीब 23 लोगों की जान चली गई और कई जख्मी भी हुए। उसके ठीक 4 दिन बाद कानपुर और इटावा के बीच औरैया के पास हादसा हुआ, जहां कैफियत एक्सप्रेस मानव रहित फाटक फाटक पर देर रात एक डंपर से टकरा गई, जिससे ट्रेन के 10 डिब्बे पटरी से उतर गए। इस बीच रेलवे को लेकर सरकार की तरफ से एक परिवर्तन जरूर यह हुआ है कि कुछ रेल अधिकारियों की कुर्सी छिनने और बदलने के क्रम में रेल मंत्री भी बदल गए हैं। हालांकि सरकार ने अपनी तौर पर एक बार भी यह नहीं कहा है कि रेल हादसों की वजह से सुरेश प्रभु को रेल मंत्रालय से हटाकर दूसरे मंत्रालय में डाला गया और उनकी जगह पीयुष चावला को रेल मंत्री बनाया गया है।

ऐसे में सवाल है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कहीं न कहीं उन्हीं राजनेताओं की कतार में शामिल नहीं होते जा रहे हैं, जो सत्ता और चमकते विकास को एक-दूसरे की सीढ़ी मानते हैं। बात गुजरात चुनाव की ही करें तो क्या बुलेट ट्रेन को सामने लाकर नरेंद्र मोदी गुजरात की वाजिब समस्याओं को चुनावी एजेंडा बनाने से भाग नहीं रहे हैं। पिछले ही साल यूनीसेफ की एक स्टडी के मुताबिक गुजरात कुपोषण से जूझ रहा है। राज्य में तकरीबन 33.6 प्रतिशत बच्चे कम वजन और 41.6 प्रतिशत बच्चे खराब ग्रोथ की समस्या से जूझ रहे हैं। अब जब एक लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा की लागत से अहमदाबाद और मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन दौड़ाने की बात हो रही है तो यह सवाल फिर से खड़ा हो रहा है कि इससे गुजरात और महाराष्ट्र के गरीब लोगों को क्या मिलेगा। अहमदाबाद से मुंबई की दूरी 524 किलोमीटर है और इसे पूरी करने के लिए दिन भर ट्रेनें जाती हैं। इसके अलावा अहमदाबाद में एक एयरपोर्ट हैं और यहां से हर दिन 10 उड़ानें हैं। 6 लेन की एक्सप्रेस-वे के साथ अहमदाबाद और मुंबई स्वर्णिम चुतर्भुज राजमार्ग नेटवर्क का हिस्सा है।

ये सारी आवागमन की सुविधाओं को बीच बुलेट ट्रेन की रफ्तार से यातायात में क्या आसानी पैदा होगी। क्या इसे हम सार्वजनिक परिवहन के एक किफायती मॉडल के तौर पर देख सकते हैं। जाहिर है कि ऐसा नहीं है, क्योंकि बुलेट ट्रेन की बड़ी लागत के कारण ही कई देशों ने इसे अस्वीकार किया है। जाहिर है जो कुछ भी बुलेट ट्रेन की घोषणा के नाम पर हुआ है वह जनता को चमकते विकास के झांसे के सिवाय कुछ नहीं है। इस झांसे से अगर विकास और सत्ता की साध एक साथ पूरी होती है तो यह देश के लोकतांत्रिक विवेक को भी कई गंभीर सवालों की जद में ले आएगा।

advertisement

  • संबंधित खबरें