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राष्ट्रपति ने की सूल्तान की सराहना, बोले- टीपू की हुई ऐतिहासिक मौत

हालांकि राष्ट्रपति कोविंद ने टीपू सूल्तान को मैसूर रॉकेट के विकास काअग्रदूत बताया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य और देश के निर्माण में मैसूर और कर्नाटक के पूर्व शासकों, सैनिकों, राजनीतिज्ञों और वैज्ञानिकों के योगदान को सराहा।


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बेंगलुरुः राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने टीपू सुल्तान की सराहना करते हुए कहा कि मैसूर के शासक अंग्रेजों से लड़ते हुए 'ऐतिहासिक मृत्यु' को प्राप्त हुए थे। हालांकि कुछ दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने टीपू को 'क्रूर हत्यारा और सामूहिक दुष्कर्मी' बताया था। कोविंद ने कर्नाटक विधानसभा के भवन विधान सौध के 60 वर्ष पूरे होने पर हीरक जयंती समारोह के अवसर पर यह बातें कहीं।

हालांकि राष्ट्रपति कोविंद ने टीपू सूल्तान को मैसूर रॉकेट के विकास काअग्रदूत बताया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य और देश के निर्माण में मैसूर और कर्नाटक के पूर्व शासकों, सैनिकों, राजनीतिज्ञों और वैज्ञानिकों के योगदान को सराहा। इसी क्रम में कोविंद ने टीपू के बारे में जैसे ही बोला, पूरे सदन ने इसका जोरदार स्वागत किया। राष्ट्रपति ने यह बयान ऐसे समय दिया है, जब कुछ दिन पहले ही भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने टीपू सुल्तान को 'क्रूर हत्यारा, नीच कट्टरपंथी और सामूहिक दुष्कर्मी' बताया था। राज्य की कांग्रेस सरकार राज्य में 10 नवंबर को टीपू जयंती मनाएगी। हेगड़े ने राज्य सरकार से इस समारोह में निमंत्रित लोगों की सूची में उन्हें शामिल नहीं करने के लिए कहा था।

वहीं सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति का टीपू को सराहने का बयान बीजेपी के गले नहीं उतर रहा है। बीजेपी नेता एवं पूर्व उप सीएम के.एस. ईश्वरप्पा ने कहा कि सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रपति को 'जबरदस्ती' टीपू सुल्तान पर बोलने के लिए कहा है। ईश्वरप्पा ने संयुक्त सत्र के बाद कहा कि यह भाषण कांग्रेस सरकार द्वारा जानबूझकर राष्ट्रपति से टीपू सुल्तान की सराहना के लिए बुलवाया गया है। कर्नाटक कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष दीनेश गुंडु राव ने कहा कि बीजेपी राष्ट्रपति के भाषण की आलोचना कर उनका अपमान कर रही है। राव ने कहा कि वे हमारे देश के राष्ट्रपति का केवल अपमान कर रहे हैं।

सत्तारूढ़ कांग्रेस ने वर्ष 2015 में 10 नवंबर को टीपू जयंती के रूप में मनाने का फैसला किया था, जिसके बाद दक्षिणपंथी संगठनों ने मैसूर और राज्य में अन्य जगहों पर हिंसक प्रदर्शन किए थे। भारतीय जनता पार्टी राज्य में टीपू को हिंदू-विरोधी और कन्नड़-विरोधी बताकर इस जयंती का विरोध करती रही है। टीपू सुल्तान ने अपने पिता हैदर अली के निधन के बाद वर्ष 1782-1799 तक मैसूर पर शासन किया था।

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