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मध्य प्रदेश पीएससी चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल, आयोग ने दी सफाई

पिछले दिनों पीएससी मुख्य परीक्षा के नतीजे आए। इन नतीजों में आगर मालवा के दो केंद्रों से प्रारंभिक परीक्षा में चयनित 47 परीक्षार्थियों में से 23 का मुख्य परीक्षा के जरिए चयन हुआ है।


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भोपाल: मध्य प्रदेश में लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में एक ही समाज के 18 लोगों के चयनित होने पर कई सवाल उठ रहे हैं। बता दें कि मध्य प्रदेश के एक ही जिले के सफल हुए 23 परिक्षार्थियों में से 18 लोगों के जैन समाज से होने के कारण यह सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इसे दूसरा व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाला बताया जा रहा है तो वहीं आयोग ने परीक्षा के पूरी तरह पारदर्शी होने का दावा किया है।

बता दें कि पिछले दिनों पीएससी मुख्य परीक्षा के नतीजे आए। इन नतीजों में आगर मालवा के दो केंद्रों से प्रारंभिक परीक्षा में चयनित 47 परीक्षार्थियों में से 23 का मुख्य परीक्षा के जरिए चयन हुआ है। इसमें से 18 परीक्षार्थियों के नाम के आगे 'जैन' लगा है। आरोप तो यहां तक लगाए गए हैं कि परीक्षा नियंत्रक, प्रभारी परीक्षा नियंत्रक और केंद्र मालिक भी इसी वर्ग के थे लिहाजा ऐसे नतीजे आए हैं।

वहीं मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव बादल सरोज का आरोप है कि व्यापमं के पदचिन्हों पर चलते हुए मध्यप्रदेश पीएससी के परिणामों ने पढ़े लिखे युवाओं के भविष्य पर कालिख पोतने और निष्पक्ष और प्रतियोगी मानी जाने वाली परीक्षाओं का पूरी तरह भ्रष्टाचारीकरण कर दिया है। इतना ही नहीं नया रिकॉर्ड कायम कर इस बार परिणामों ने नकदी लेनदेन के साथ जाति, धर्म को भी शामिल किया है।

बादल सरोज ने कहा कि जो खुलासे हुए हैं, उससे पीएससी के परीक्षा नियंत्रक और प्रभारी परीक्षा नियंत्रक तथा संबंधित परीक्षा केंद्र के मालिक को तत्काल हिरासत में लेकर पूछताछ की जानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि वह तीनों उसी समुदाय के है, जिस समुदाय के सर्वाधिक परीक्षार्थी मुख्य परीक्षा में सफल हुए हैं। सरोज ने कहा कि व्यापमं घोटाले के महानायक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को बताना चाहिए कि वह कितने लाख युवाओं का भविष्य और चौपट करेंगे। अब तो उन्हें प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के साथ उनके पूरे कार्यकाल में किए जा रहे खिलवाड़ का जिम्मा लेना लेना चाहिए।

हालांकि आयोग ने सोमवार को एक विज्ञप्ति के जरिए स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया पूर्ण रूप से पारदर्शी होती है, जिसमें परीक्षा नियंत्रक या अन्य अधिकारियों का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। प्रारंभिक परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्र की मांग अभ्यर्थी द्वारा अपनी सुविधा के अनुसार एम़ पी़ ऑनलाइन से आवेदन के समय की जाती है। आयोग का कहना है कि मुख्य परीक्षा प्रदेश के चार शहर इंदौर, भोपाल, ग्वालियर तथा जबलपुर में संभाग आयुक्त के नियंत्रण में आयोजित की जाती है। इसमें भी आयोग कार्यालय अथवा नियंत्रक का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है।

 

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