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आरबीआई ने प्रमुख ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, तरलता बढ़ाई

रेपो दर वह दर होती है, जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को अल्पावधि के लिए उधारी देता है। आरबीआई ने इसी तरह रिवर्स रेपो दर में भी कोई बदलाव नहीं करते हुए उसे 5.75 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है।


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मुंबईः बढ़ती महंगाई के दबाव और राजकोषीय घाटे की चिंताओं को देखते हुए आरबीआई ने अपनी प्रमुख ब्याज दरों को यथावत रखा है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने तरलता बढ़ा दी है और इसके साथ ही देश के विकास दर अनुमान को घटा दिया है। इन सबके लिए वस्तु एवं सेवा कर के क्रियान्वयन, उपभोक्ता और कारोबारी विश्वास के घटने को जिम्मेदार बताया गया है। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक की 2017-18 के लिए चौथी द्विमाही मौद्रिक नीति समीक्षा के मुताबिक, रेपो दर को 6 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।

बता दें कि रेपो दर वह दर होती है, जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को अल्पावधि के लिए उधारी देता है। आरबीआई ने इसी तरह रिवर्स रेपो दर में भी कोई बदलाव नहीं करते हुए उसे 5.75 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है। वहीं चौथी द्विमाही मौद्रिक नीति समीक्षा से जारी बयान में कहा गया है कि एमपीसी (मौद्रिक नीति समिति) का निर्णय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की चार प्रतिशत महंगाई दर के लक्ष्य को हासिल करने और वृद्धि दर को समर्थन देने के उद्देश्य के लिए मौद्रिक नीति के एक तटस्थ रुख के अनुरूप है।

यह निर्णय आरबीआई के गवर्नर उर्जित आर. पटेल की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय एमपीसी ने लिया है। समिति के पांच सदस्यों ने ब्याज दरों को यथावत रखने के पक्ष में वोट किया। इस छह सदस्यीय एमपीसी में तीन सदस्य सरकार के और तीन आरबीआई के होते हैं। हालांकि आरबीआई ने अगस्त में अपनी पिछली नीतिगत समीक्षा के दौरान रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर उसे 6.25 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया था।

वहीं बयान में यह भी कहा गया है कि एमपीसी ने देखा कि सीपीआई महंगाई दर पिछली बैठक से अबतक लगभग दो प्रतिशत बढ़ गई है। महंगाई के इस तरह के जोखिम से सावधानी के साथ निपटने की जरूरत है। यद्यपि घरेलू खाद्य मूल्य परिदृश्य व्यापक तौर पर स्थिर है, लेकिन अखाद्य वस्तुओं, खासतौर से कच्चे तेल से महंगाई की रफ्तार लगातार बढ़ रही है, लेकिन व्यवस्था में तरलता डालने के लिए आरबीआई ने वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) को 50 आधार अंक घटाकर 19.50 प्रतिशत कर दिया, जो 15 अक्टूबर से प्रभावी रुप से लागू होगा।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए देश के विकास दर अनुमान को घटाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। इसके पहले आरबीआई ने देश के योजित सकल मूल्य (जीवीए) की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत अनुमानित किया था। मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान विभिन्न कारकों को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 के लिए वास्तवित जीवीए वृद्धि दर को संशोधित कर 6.7 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके पहले अगस्त का अनुमान 7.3 प्रतिशत था। इस बीच एसएलआर कटौती की घोषणा के बाद बैंकिंग के शेयरों की अच्छी मांग के कारण शेयर बाजारों में तेजी दर्ज की गई।

 

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