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महाकाल की नए नियमों के तहत हुई पूजा, सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश

वहीं महाकालेश्वर प्रबंध समिति से जुड़े एक पदाधिकारी ने कहा कि महाकाल के क्षरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर हुई थी। उसके बाद कोर्ट के द्वारा गठित विशेशज्ञों का दल मंदिर में जांच के लिए भी आया था।


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नई दिल्ली: मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकाल शिवलिंग की आज नए नियमों के तहत भस्मारती और जलाभिषेक किया गया। भारत के प्रमुख ज्योर्तिलिंगों में से एक उज्जैन के महाकाल की शिवलिंग के क्षरण ने सभी को चिंता में डाल दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा है कि अब महाकाल को आरओ जल से स्नान कराया जाएगा। श्रद्धालु अब महाकाल को 500 मिली लिटर से ज्यादा जल नहीं चढ़ा पाएंगे। बता दें कि महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने एक कार्ययोजना बनाकर शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय में पेश किया था। मंदिर प्रबंध समिति ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि महाकाल को अब आरओ जल से स्नान कराया जाए।

वहीं महाकालेश्वर प्रबंध समिति से जुड़े एक पदाधिकारी ने कहा कि महाकाल के क्षरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर हुई थी। उसके बाद कोर्ट के द्वारा गठित विशेशज्ञों का दल मंदिर में जांच के लिए भी आया था। उसके बाद मंदिर समिति ने क्षरण को रोकने के लिए आठ निर्णय लिए, जिसे सुनवाई के दौरान शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया गया। महाकाल मंदिर समिति की सहायक प्रशासनिक अधिकारी प्रीति चौहान ने कहा कि न्यायालय के सभी निर्देश उन तक नहीं आए हैं, मगर शिवलिंग के स्नान के लिए आरओ जल का जिक्र है। इस दिशा में पहल की जाएगी। फिलहाल एक आरओ प्लांट है, जिसका श्रद्धालु उपयोग करते हैं, अभी उसी से अभिषेक के लिए जल दिया जाएगा। जल्दी ही एक और प्लांट लगाया जाएगा।

हालांकि सूत्र बताते है कि विशेषज्ञों ने अपनी जांच में पाया कि जलाभिषेक में प्रयुक्त होने वाले जल और पंचामृत की सामग्री समेत अन्य पूजन में उपयोग होने वाली वस्तुओं से महाकाल के शिवलिंग का क्षरण हो रहा है। मंदिर समिति ने न्यायालय को बताया कि भस्मारती के समय शिवलिंग को आधा नहीं, सूती कपड़े से पूरा ढका जाए, सवा लीटर से ज्यादा पंचामृत न चढ़ाया जाए, इसमें शक्कर का इस्तेमाल बिलकुल नहीं होना चाहिए, शाम को पांच बजे के बाद जलाभिषेक नहीं होगा। इसके अलावा गर्भगृह में सामान्य तापमान तय करने के इंतजाम भी किए जाएं। वहीं न्यायालय ने विशेशज्ञों के दल और मंदिर प्रबंध समिति के सुझावों को सराहा है और उस पर अपनी सहमति भी जताई है। 

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