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यूजीसी पैनल ने कहा- बीएचयू से एच और एएमयू से एम हटाया जाए

यह ऑडिट विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा 25 अप्रैल को मानव संसाधन मंत्रालय के कहने पर किया गया। मंत्रालय 10 केंद्रीय विश्‍वविद्यालयों में हो रही अनियमितताओं की शिकायतों की जांच चाहता था


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नई दिल्लीः सरकार द्वारा हाल ही में केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर एक ऑडिट कराई गई है। इस ऑडिट में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से एम और बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के नाम से एच हटाने की सलाह दी गई है ताकि विश्‍वविद्यालयों का सेक्‍युलर चरित्र प्रदर्शित हो सके।

बता दें कि यह ऑडिट विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा 25 अप्रैल को मानव संसाधन मंत्रालय के कहने पर किया गया। मंत्रालय 10 केंद्रीय विश्‍वविद्यालयों में हो रही अनियमितताओं की शिकायतों की जांच चाहता था। हालांकि एएमयू ऑडिट में बीएचयू शामिल नहीं था, लेकिन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इसका संदर्भ दिया है।

एएमयू से के अलावा जिन विश्‍वविद्यालयों का ‘शैक्षिक, वित्‍तीय, शोध और मूलभूत संरचना का ऑडिट’ कराया गया है, उनमें पांडिचेरी यूनिवर्सिटी, झारखंड की सेंट्रल यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, राजस्‍थान की सेंट्रल यूनिवर्सिटी, जम्‍मू की सेंट्रल यूनिवर्सिटी, वर्धा का महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय, उत्‍तराखंड की हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी, त्रिपुरा की सेंट्रल यूनिवर्सिटी, मध्‍य प्रदेश की हरि सिंह गौर यूनिवर्सिटी शामिल है।

एएमयू और पांडिचेरी का निरीक्षण करने वाली कमेटी में आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर श्रीपाद करमालकर, गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मज़हर आसिफ म‍हर्षि दयानंद सरस्‍वती यूनिवर्सिटी के वीसी कैलाश सोदानी और आईआईएम बेंगलुरु के प्रोफेसर संकर्षण बसु शामिल थे। एएमयू की ऑडिट में कमेटी ने सुझाव दिया कि संस्‍थान को सिर्फ ‘अलीगढ़ यूनिवर्सिटी’ कहा जाए या फिर इसके संस्‍थापक, सर सैयद अहमद खान के नाम पर रख दिया जाए। इसके साथ ही कमेटी ने बीएचयू का नाम बदलने के लिए भी यही वजहें दीं।।

वहीं पैनल के सदस्‍यों ने बताया कि इस सुझाव के पीछे यह तर्क है कि एएमयू, केंद्र द्वारा वित्‍त पोषित होने के कारण सेक्‍युलर संस्‍था है। कमेटी ने एएमयू की प्रकृति को ‘सामंती’ बताया है और कैंपस में गरीब मुस्लिमों की स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए कदम उठाने की जरूरत बताई है। कमेटी ने संस्‍था के अल्‍पसंख्‍यक दर्जे पर कोई टिप्‍पणी नहीं की है क्‍योंकि इससे जुड़े वाद कोर्ट में चल रहे हैं।

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