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राजनीति


देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था पर सिन्हा ने जेटली पर साधा निशाना

नई दिल्ली: बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने वित्तमंत्री अरुण जेटली पर भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत बिगाड़ने और इससे उत्पन्न 'आर्थिक सुस्ती' के लिए निशाना साधा है। सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी दावा करते हैं कि उन्होंने बहुत करीब से गरीबी को देखा है और उनके वित्तमंत्री भी सभी भारतीयों को गरीबी करीब से दिखाने के लिए काफी मेहनत कर रहे हैं।


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विरासत में मिला समस्याओं को और बढ़ाया गया
सिन्हा ने कहा कि जेटली अपने पूर्व के वित्त मंत्रियों के मुकाबले बहुत भाग्यशाली रहे हैं। उन्होंने वित्त मंत्रालय की बागडोर उस समय हाथों में ली, जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल कीमत में कमी के कारण उनके पास लाखों-करोड़ों रुपए की धनराशि थी, लेकिन उन्होंने तेल से मिले लाभ को गंवा दिया। विरासत में मिली समस्याएं, जैसे बैंकों के एनपीए और रुकी परियोजनाएं निश्चित ही उनके सामने थीं, लेकिन उन्हें इससे सही ढंग से निपटना चाहिए था। विरासत में मिली समस्या को न सिर्फ बढ़ने दिया गया बल्कि यह अब और खराब हो गई है।

दो दशकों में पहली बार कम हुआ निजी निवेश
सिन्हा ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर कहा कि दो दशकों में पहली बार निजी निवेश इतना कम हुआ और औद्योगिक उत्पादन पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। कृषि की हालत खस्ता है, विनिर्माण उद्योग मंदी के कगार पर है और अन्य सेवा क्षेत्र धीमी गति से आगे बढ़ रहा है, निर्यात पर बुरा असर पड़ा है, एक बाद एक सेक्टर संकट का सामना कर रहे हैं। बता दें कि वाजपेयी सरकार में सिन्हा वित्तमंत्री थे। उन्होंने कहा कि गिरती अर्थव्यवस्था में नोटबंदी ने आग में घी डालने का और बुरी तरह लागू किए गए जीएसटी से उद्योग को भारी नुकसान पहुंचा है और कई लोग इसकी वजह से बर्बाद हो गए हैं।

लाखों लोगों को गवानी पड़ी नौकरी
सिन्हा ने कहा कि इस वजह से लाखों लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी और बाजार में मुश्किल से ही कोई नौकरी पैदा हो रही है। मौजूदा वित्त वर्ष की पिछली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर गिर कर 5.7 प्रतिशत हो गई, लेकिन पुरानी गणना के अनुसार यह वास्तव में केवल 3.7 प्रतिशत ही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जीडीपी दर गणना की पुरानी पद्धति वर्ष 2015 में नहीं बदली होती तो यह अभी वास्तव में 3.7 प्रतिशत या इससे कम रहती। उन्होंने सरकार पर आर्थिक वृद्धि दर कम होने को तकनीकी वजह बताने की आलोचना की और कहा कि यह आर्थिक सुस्ती अस्थायी या तकनीकी नहीं है, यह फिलहाल बनी रहने वाली है।

वित्त मंत्रालय का कार्य संभालना है मुश्किल
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक गति कम होने की वजहों का अनुमान लगाना बहुत मुश्किल नहीं है और इससे निपटने के लिए उपाय किए जाने चाहिए, लेकिन इसके लिए दिमाग का गंभीरता से उपयोग करने, मुद्दे को समझने और इससे निपटने के लिए योजना बनाने की जरूरत है। जेटली को वित्त मंत्रालय के अलावा और कई विभागों की जिम्मेदारियां भी दी गईं हैं, जिससे उनपर अतिरिक्त जिम्मेदारियां आईं और शायद उनसे बहुत ज्यादा अपेक्षा की गई। इसके साथ उन्होंने कहा कि मैंने वित्त मंत्रालय का काम संभाला है और मुझे पता है कि वहां कितना कठिन परिश्रम करना पड़ता है। वित्त मंत्रालय में 24 घंटे सातों दिन काम करना पड़ता है, जिसे जेटली जैसे सुपरमैन भी पूरा नहीं कर सकते।

कुछ लोग डर की वजह से नहीं बोल रहे
सिन्हा ने कहा कि उन्होंने महसूस किया कि अगर मैं अब भी नहीं बोलूंगा तो यह मेरे राष्ट्रीय कर्तव्यों के साथ अन्याय होगा। मैं इस बात से भी सहमत हूं कि बीजेपी में बड़ी संख्या में लोग इस बात को कहना चाहते हैं, लेकिन वे डर की वजह से कुछ नहीं बोल रहें हैं। जीएसटी के अंतर्गत एकत्रित 95000 करोड़ रुपए में इनपुट क्रेडिट डिमांड 65,000 करोड़ रुपए है। सरकार ने आयकर विभाग को बड़ी संख्या में दावा करने वाले को पकड़ने को कहा है। वित्तीय प्रवाह की समस्या कई कंपनियों, खासकर छोटे और मध्यम उद्योग सेक्टर की समस्या है, लेकिन वित्त मंत्रालय का काम करने का यही तरीका है। सिन्हा ने कहा कि हम जब विपक्ष में थे तो हमने 'छापे मारी' का विरोध किया था, लेकिन आज तो यह जैसे व्यवस्था का हिस्सा बन गई है।

 

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